एसटीएफ के अधिकारियों के अनुसार यह बात भी सामने आ रही है कि कुछ छात्रों ने तीन-तीन कापियां भी बदलवाकर घर पर लिखी हैं। हो सकता है कि छात्रों ने घर पर कॉपी लिखने के लिए एमबीबीएस के डॉक्टरों का भी सहारा लिया गया हो।
सीओ एसटीएफ के अनुसार सीसीएसयू में साल 2014 से यह खेल चल रहा था। इसके बाद चौधरी चरण सिंह विवि के संबद्ध जिन मेडिकल कॉलेजों की कॉपी विवि कैंपस में आकर रखी जाती थी, उन सभी कॉलेजों के साल 2014 से लेकर अब तक के एमबीबीएस के टॉपर भी निशाने पर हैं। माना जा रहा है कि विवि प्रशासन को पत्र भेजकर टॉपरों की सूची जल्द मांगी जाएगी। पूरे मामले में एमबीबीएस के टॉपरों के भी होश उड़े हुए हैं।
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