हिंदू और मुस्लिम दर्शन की दे रहे थे तालीम
मौलाना चतुर्वेदी ने काफी पहले बताया था कि मदरसे में देश के विभिन्न राज्यों के 200 से ज्यादा छात्र हैं। छात्रों को अरबी, फारसी, हिंदी, अंग्रेजी और उर्दू की तालीम दी जाती है। यहां हाफिज, कारी और आलिम की डिग्री मिलती है। यहां वह मदरसे के छात्रों को इस्लाम के साथ हिंदू दर्शन के बारे में जानकारी देते थे।
सर्वधर्म-संस्कृति सम्मेलनों में करते थे शिरकत
मौलाना चतुर्वेदी देश के विभिन्न शहरों में होने वाले सर्वधर्म-संस्कृति सम्मेलनों में हिस्सा लेते रहते थे। मौलाना ने बताया था कि देश का ऐसा कोई राज्य नहीं, जहां वह न गए हों। देश प्रेम, सांप्रदायिक सौहार्द और आपसी भाईचारा कायम करने के लिए वह सभी धार्मिक मंचों पर जाते रहते थे।
मजहबी गलत फहमियां दूर करने का प्रयास
मौलाना चतुर्वेदी 40 साल तक देवबंद के एक समाचार पत्र में चीफ एडिटर रहे और इसे चलाया। धार्मिक, सामाजिक, आर्थिक विषयों पर एक दर्जन से ज्यादा पुस्तकें लिख चुके थे। इनमें खासतौर पर इस्लाम और हिंदू धर्म के बीच गलत फहमियों को दूर करने का प्रयास किया गया।
देश भक्ति के भाव से चलता है देश
मौलाना चतुर्वेदी कहते थे कि सियासत के चलते ही नेता हिंदू-मुस्लिम एकता को नुकसान पहुंचाने का काम करते हैं। देश किसी भी धर्म के भड़काऊ नारों से नहीं, बल्कि देश भक्ति की भावना से आगे बढ़ता है। पाकिस्तान बनने पर ला इलाहा इल्लल्लाह मुहम्मदुर्रसूलुल्लाह (अल्लाह के सिवा कोई माअबूद नहीं है। मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अल्लाह के रसूल हैं।) का नारा लगाया गया था। अब पाकिस्तान का क्या हश्र है, यह सभी देख रहे हैं। देश दो चीजों से आगे बढ़ता है, एक देश प्रेम की भावना और देश वासियों से प्रेम। सिर्फ नारों में उलझकर आपस में लड़ना देश से सच्ची मोहब्बत नहीं है।