इसके अलावा मुफ्ती फुजैल ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वरिष्ठ सदस्य होने के साथ ही विभिन्न सामाजिक संगठनों से भी जुड़े हुए थे। लगभग 40 वर्षों तक वह पंजाब सरकार में बतौर शाही इमाम के पद पर रहे। उन्होंने दारुल उलूम से शिक्षा पूर्ण की और काफी समय तक यहीं पर शिक्षण कार्य किया। इस दौरान उन्होंने कई इस्लामी पुस्तकें भी लिखीं, जो देश ही नहीं बल्कि विदेशों के दीनी मदरसों में पढ़ाई जाती हैं।
उनके इंतकाल पर दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी बनारसी, दारुल उलूम वक्फ के मोहतमिम मौलाना सुफियान कासमी, जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी, मौलाना महमूद मदनी, मौलाना अब्दुल खालिक मद्रासी, कारी उस्मान मंसूरपुरी, मुस्लिम फंड ट्रस्ट के महाप्रबंधक सुहैल सिद्दीकी, पूर्व विधायक माविया अली, कारी इसहाक गोरा, मुफ्ती असद कासमी, हाफिज अनवर उस्मानी, मुफ्ती शरीफ खान, मौलाना हसनुल हाशमी, प्रसिद्ध शायर डॉ. नवाज देवबंदी, जामिया तिब्बिया मेडिकल कालेज के सचिव डॉ. अनवर सईद, मौलाना अहमद खिजर शाह मसूदी आदि ने उनके इंतकाल को इस्लामिक जगत के लिए अपूर्णनीय क्षति बताया है।
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