मेरठ। एनजीटी के आदेश के चलते भले ही दस साल पुराने डीजल वाहनों को आरटीओ ने नोटिस देकर सीज करने की चेतावनी दे दी हो, लेकिन शहर में इनसे कई गुना घातक ‘जुगाड़’ खूब फर्राटा भर हैं। पूरी तरह अवैध इन जुगाड़ों के जरिये मंडी का कारोबार फल फूल रहा है। फल-सब्जी से लेकर भूसा, खाद्य सामग्री, ईंट, बजरी और सरिया तक ढोया जा रहा है। मौत बनकर सड़क पर दौड़ने वाले जुगाड़ों को न तो आरटीओ का प्रवर्तन दल पकड़ रहा है और न ही ट्रैफिक पुलिस।
शहर के बाजारों को मंडी से सामान की आपूर्ति पहले बैलगाड़ी, ऊंटगाड़ी और घोड़ागाड़ी आदि से की जाती थी। इन पर प्रतिबंध लगने के बाद इनकी जगह अब स्कूटर-ठेला जुगाड़ ने ले ली है। तीन पहियों के रिक्शा-ठेले के नीचे स्कूटर और मोटरसाइकिल का इंजन लगाकर इसे स्कूटर-ठेला जुगाड़ बना दिया गया है। शहर और आसपास के इलाकों में तीन हजार से ज्यादा जुगाड़ फर्राटा भरते घूम रहे हैं। इन जुगाड़ों पर 5 से दस क्विंटल तक सामन लादकर बाजारों और बाजारों से ग्राहकों तक पहुंचाया जा रहा है। दिल्ली रोड स्थित नवीन मंडी से ही सैकड़ों जुगाड़ शहर के विभिन्न बाजारों में सुबह से लेकर शाम तक माल की ढुलाई करते हैं। बाजारों से कॉलोनियों तक भी जुगाड़ सामान की ढुलाई कर रहे हैं।
जुगाड़ चालकों के पास नहीं लाइसेंस
अधिकतर जुगाड़ चालकों के पास लाइसेंस तक नहीं हैं। इन वाहनों से हादसे हो रहे हैं, इसके बावजूद पुलिस न तो जुगाड़ों को पकड़ रही है और न ही आरटीओ का प्रवर्तन दल इन्हें सीज कर रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने दे रखा है पकड़कर काटने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने भी इस तरह के वाहनों को पकड़कर काटने का आदेश दे रखा है, लेकिन इसके बावजूद कम होने की बजाय जुगाड़ों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। कम खर्च में अच्छी कमाई का जरिया होने के चलते इसकी संख्या बढ़ रही है। पुलिस के साथ सेटिंग के जरिये ये शहरभर में पूरे दिन घूमते रहते हैं।
दस हजार रुपये में हो जाता है तैयार
एक जुगाड़ चालक ने बताया कि यह दस हजार रुपये में तैयार हो जाता है। इसके लिए पुराने स्कूटर या मोटरसाइकिल का इंजन लेना होता है। इसके बाद जुगाड़ के चेसिस और पहियों पर इसे लगा दिया जाता है।
लगातार हो रही कार्रवाई
शहर में दौड़ रहे जुगाड़ों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसके लिए व्यापारियों को भी जागरूक होना होगा। ऐसे वाहनों के जरिये माल की ढुलाई कराने पर ही इनकी संख्या बढ़ रही है। जल्द ही इनके खिलाफ विशेष अभियान चलाया जाएगा। - दिनेश कुमार, एआरटीओ प्रवर्तन