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पटाखों से प्रदूषण...घुट गया दमा रोगियों का दम

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मेरठ। पटाखों से फैले प्रदूषण ने असर दिखाना शुरू कर दिया है। किसी का सीना जकड़ रहा है तो किसी को सांस लेने में परेशानी हो रही है। इन परेशानियों को लेकर काफी मरीज मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल की इमरजेंसी में आए। काफी संख्या में मरीज निजी चिकित्सकों के पास गए। इनमें ज्यादा सांस और अस्थमा के मरीज शामिल रहे।
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वातावरण में सल्फर डाई ऑक्साइड और कार्बन डाई ऑक्साइड की मात्रा बढ़ जाने से पर्यावरण ही नहीं सेहत को भी काफी नुकसान होता है। पटाखों में कई खतरनाक पदार्थ रहते हैं। इनके फूटने से वातावरण में यह धुएं के साथ भरपूर मात्रा में फैल जाते हैं। सांस नलिकओं में पहुंचने के बाद नलिकाएं संकुचित हो जाती हैं और इससे मरीजों को दिक्कत बढ़ जाती है। सांस एवं छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. वीरोत्तम तोमर ने बताया कि मरीजों को एहतियात बरतनी होगी। खासतौर पर ऐसे मरीज अगर घर से बाहर निकलें तो उन्हें मुंह ढककर रखें। जो दवाइयां ले रहे हैं, वह लेते रहें और घर पर गर्म पानी की भाप लें, इससे राहत मिलेगी। सांस एवं छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित अग्रवाल ने बताया कि ऐसे में फेफड़ों में संक्रमण और दमा के मरीजों को दिक्कत होती है। आंखों में जलन, संक्रमण का खतरा रहता है। खुजली और लाल दाने भी हो जाते हैं। प्रदूषण की वजह से सांस रोगियों की यह परेशानी अभी कई दिन रहेगी।
इमरजेंसी में पहुुंचे जले हुए मरीज
दिवाली पर पटाखों से जले हुए करीब दो दर्जन से ज्यादा मरीज सरकारी अस्पतालों (मेडिकल कॉलेज-जिला अस्पताल) की इमरजेंसी में पहुंचे। इनका उपचार किया गया। अधिकांश मरीज हाथ जलने के थे। एक दर्जन से ज्यादा मरीज आंखों में जलन के भी थे।
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