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जिले में मोहर्रम पर मजलिसें शुरू

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मोहर्रम की मजलिस में लोग। संवाद - फोटो : mrt
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माई सिटी रिपोर्टर
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मेरठ। मोहर्रम के पहले दिन शुक्रवार को इमामबारगाहों में अलम सजा दिए गए। जगह-जगह मजलिसों और मातम का दौर शुरू हो गया। इमाम हुसैन का गम अकीदत के साथ मनाया जा रहा है।

सुबह नौ बजे इमामबारगाह छोटी कर्बला में मोहर्रम की पहली मजलिस का आयोजन किया गया। इसकी शुरुआत फैसल अली के मातम की तिलावत से हुई। इसके बाद मौलाना सैयद अब्बास बाकरी ने मिम्बर से लोगों को संबोधित किया। मौलाना ने इस वर्ष की मजलिसों का शीर्षक उस्वा-ए- हुसैनी रखा और अपनी पहली मजलिस में मातम की महानता के विभिन्न पहलुओं के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि मातम सिर्फ मातम नहीं है, बल्कि एक जागरूक आंदोलन है जो इमाम हुसैन के संदेश को जिंदा रखता है। मौलाना ने मसाइब के सिलसिले में इमाम हुसैन के मदीना से कूच करने के दर्दनाक वाकये को बयान किया तो मजलिस में मौजूद हर आंख से आंसू छलक आए।
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शहर के सबसे बड़े वक्फ मनसबिया के घंटाघर स्थित अजाखाना शाह कर्बला में अशरे को संबोधित करने आए धर्मगुरु मौलाना शब्बर हुसैन खां जिनकी मजलिस का विषय फज़ल-ए- इलाही और हिदायत की जिम्मेदारी है, ने अशरे की पहली मजलिस को संबोधित किया। अशरे की सोजख्वानी दानिश आबिदी ने की। मजलिस में बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत की और शहीद-ए-कर्बला इमाम हुसैन की खिदमत में अपने आंसूओं का नजराना पेश किया।

मौलाना गुलाम अब्बास कोटला स्थित इमामबारगाह इनायत हुसैन खां में खिताब कर रहे हैं। शहर के विभिन्न इमामबारगाहों में अशरे की मजालिस शुरू हो गई है, जिसमें इमामबारगाह अली बख्श, इमामबारगाह छत्ता अली रजा, इमामबारगाह शाईक अली, इमामबारगाह करीम बख्श, इमामबारगाह मुजफ्फर अली मुअज्जिन, अजाखाना डॉ. इकबाल हुसैन, इमामबारगाह जाहिदियान आदि शामिल हैं।
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इससे पहले 26 जून की शाम जब मोहर्रम माह का चांद नजर आया तो लोगों के दिलों में गम का माहौल छा गया। इमामबारगाह छोटी कर्बला में दानिश आबिदी ने सोज पढ़ा और उस्ताद अनवर जहीर अनवर मेरठी ने मरसिया ऐ मोमिनो हुसैन से मकतल करीब हैं, पढ़ा । अकीदतमंदों ने नम आंखों से इमाम हुसैन के गम का इस्तकबाल किया। मोर्हरम कमेटी की मीडिया प्रभारी डॉ. इफ्फत जकिया ने बताया कि मजलिसों का यह सिलसिला 9 मोहर्रम तक इसी तरह जारी रहेगा और 10 मोहर्रम को सभी अजाखानों में अलविदाई मजलिसें होंगी।
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