औद्योगिक गलियारे के फेस वन में जमीनों पर सीमांकन का कार्य करती यूपीडा (ग्रामीण)
बिजौली में गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे औद्योगिक गलियारे का मामला, 20 दिन में फसल काटकर भूमि खाली करने की चेतावनी
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माई सिटी रिपोर्टर/संवाद
खरखौदा/मेरठ। बिजौली में गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे विकसित होने वाले औद्योगिक गलियारे के पहले चरण में अमेरिकी कंपनियों की खरीदी गई जमीनों पर मक्के की फसल लहरा रही है। यूपीडा की चेतावनी के बाद भी किसानों ने उस जमीन पर फसल की बुवाई कर दी। इससे नाराज यूपीडा के अधिकारियों ने जमीन खाली करने के लिए किसानों को 20 दिन का समय दिया है।
गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे मेरठ में 500 हेक्टेयर जमीन पर औद्योगिक गलियारा विकसित होना है। इसके लिए यूपीडा ने पहले चरण में खरखौदा और बिजौली के 823 किसानों की 214 हेक्टेयर कृषि भूमि खरीदी है। इस भूमि पर एक सप्ताह पहले कब्जा लेकर सीमांकन का कार्य शुरू किया गया था। हालांकि सबसे पहले जमीन की बाहरी सीमा को चिह्नित कर उस पर कब्जा करना था, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। इस बीच कई विदेशी कंपनियों ने भी वहीं जमीन खरीद ली। अमेरिकी कंपनी की खरीदी गई 19 हेक्टेयर भूमि पर किसानों ने चेतावनी के बाद भी मक्का की बुवाई कर दी।अब मक्के की फसल की कटाई के लिए करीब दो माह का समय चाहिए, लेकिन यूपीडा को उक्त भूमि पर जल्द से जल्द कब्जा लेकर सीमांकन का कराना है। इसे लेकर यूपीडा ने बिजौली स्थित अंडरपास के निकट काम भी शुरू कर दिया है। जिस कृषि भूमि पर मक्का की फसल खड़ी है, उसको लेकर यूपीडा ने किसानों को चेतावनी दी है कि शीघ्र फसल काट लें, नहीं तो कंपनी को भूमि पर कब्जा दिला दिया जाएगा।
कोट
गेहूं की फसल कटने पर सभी किसानों से उस भूमि पर किसी फसल की बुवाई न करने को कहा गया था। फिर भी किसानों ने मक्के की बुवाई कर दी। अब कंपनी ने जमीन खाली करने के लिए किसानों को 20 दिन का समय दिया है। राकेश मोगा, अधिशासी अभियंता यूपीडा।
औद्योगिक गलियारे के फेस वन में जमीनों पर सीमांकन का कार्य करती यूपीडा (ग्रामीण)