संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। भगवान महावीर जन्मभूमि कुंडलपुर समिति एवं जंबूद्वीप के प्रबंधन मंत्री विजय कुमार जैन ने कहा कि भगवान महावीर स्वामी के सिद्धांत आज के दौर में पहले से अधिक प्रासंगिक हो गए हैं। वैश्विक स्तर पर बढ़ती हिंसा, तनाव और असहिष्णुता के बीच महावीर के जियो और जीने दो तथा अहिंसा परमोधर्मः जैसे संदेश मानवता को नई दिशा दे सकते हैं।
उन्होंने बताया कि जैन धर्म के अनुसार भगवान महावीर 24वें तीर्थंकर हैं, जिनका जन्म चैत्र शुक्ल त्रयोदशी को कुंडलपुर में हुआ था। उनके जीवन को गर्भ, जन्म, तप, केवलज्ञान और मोक्ष इन पांच कल्याणकों में विभाजित किया गया है। कठोर तपस्या और 12 वर्षों के संयम के बाद उन्हें केवलज्ञान की प्राप्ति हुई और उन्होंने समस्त जीवों के कल्याण का मार्ग दिखाया।
विजय कुमार जैन ने बताया कि भगवान महावीर ने अहिंसा, सत्य, अचौर्य, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह जैसे पंच अणुव्रतों का उपदेश दिया। इन सिद्धांतों का पालन करने से व्यक्ति न केवल आत्मिक शांति प्राप्त करता है, बल्कि समाज में भी सौहार्द स्थापित होता है। उन्होंने महात्मा महात्मा गांधी का उदाहरण देते हुए कहा कि अहिंसा के मार्ग पर चलकर ही देश को आजादी मिली।
महावीर जयंती के अवसर पर जैन समाज प्रभातफेरी, शोभायात्रा, महाभिषेक और विभिन्न धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करता है। कुंडलपुर तीर्थ के विकास में हस्तिनापुर में जंबूद्वीप की प्रेरिका गणिनी प्रमुख ज्ञानमती की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, जिनकी प्रेरणा से यहां भव्य मंदिरों और धर्मशालाओं का निर्माण हुआ। उन्होंने कहा कि हस्तिनापुर की पावन भूमि पर जैन धर्म द्वारा समय-समय पर धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिल रहा है। उन्होंने कामना की कि भगवान महावीर के संदेशों से पूरे विश्व में शांति और अहिंसा की स्थापना हो।