डॉक्यूमेंट्री के अनुसार, गांधी जी मेरठ में सबसे पहले 22 जनवरी 1920 में देवनागरी स्कूल में आए। उन्हें बग्घी में बैठाकर बैंड-बाजे के साथ शहर में जुलूस निकाला गया। कम्बोह दरवाजा (अब घंटाघर) पर गांधीजी ने कहा था कि यदि टर्की का प्रश्न पक्षपातरहित ढंग से हल नहीं होता है तो भारत में असंतोष की लहर उठ जाएगी।
ऐसी स्थिति में हथियार नहीं, सत्याग्रह का प्रयोग किया जाना चाहिए। यहां से गांधी जी वेस्ट एंड रोड स्थित मुस्तफा कैसल पहुंचे और बैरिस्टर इस्माईल खां से मिले। सनातन धर्म हॉल में गांधीजी ने महिला सम्मेलन में स्ति्रयों को सादा जीवन और उच्च आदर्शों का उपदेश दिया। बर्फखाना मैदान में जनसभा में गांधी जी को अभिनंदन पत्र दिए गए। यहां से मेरठ कॉलेज में जाकर गांधीजी ने छात्रों को चरित्र निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया।
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1929 में फिर से मेरठ आए महात्मा गांधी
प्रो. केके शर्मा ने बताया कि 1929 में मेरठ पूरे देश में चर्चित हुआ। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को गिरफ्तार करके मेरठ लाया गया। मेरठ में ही इन नेताओं पर ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध षड्यंत्र करने के आरोप में मुकदमा चलाया गया, जिसे मेरठ षड्यंत्र केस के नाम से जाना जाता है। 27 अक्टूबर 1929 को महात्मा गांधी ने मेरठ आकर जेल में मेरठ षड्यंत्र केस के आरोपियों से भेंट की।
मेरठ कॉलेज में गांधीजी ने बैठक की। 28 अक्टूबर को गांधीजी कार से सरधना, निवाड़ी और पिलखुवा गए। पिलखुवा से असोड़ा स्थित चौधरी रघुवीर नारायण सिंह त्यागी के महल में पहुंचे। यहां से हापुड़ गए। 30 अक्टूबर को कैली, पांची, खरखौदा, फलावदा, मवाना पहुंचे और परीक्षितगढ़ और किठौर में भी जनसभाएं की।
1920 में हुई थी गढ़ रोड गांधी आश्रम की स्थापना
इतिहासकार प्रो. केके शर्मा ने बताया कि 31 नवंबर 1920 में मेरठ में गढ़ रोड गांधी आश्रम की स्थापना हुई। इस आश्रम के लिए असोड़ा के चौधरी रघुवीर नारायण सिंह त्यागी ने जमीन उपलब्ध कराई थी। बाद में यह गांधी आश्रम स्वतंत्रता आंदोलन का बड़ा केंद्र बन गया। अंग्रेजों को भगाने के लिए इसी गांधी आश्रम में रहकर क्रांतिकारियों ने योजनाएं बनाई।
1930 में भी मेरठ से होकर गए थे महात्मा गांधी
डॉक्यूमेंट्री के अनुसार, महात्मा गांधी 1930 में भी मेरठ से होकर गुजरे। उस समय भी उन्होंने मेरठ में कई स्वतंत्रता सेनानियों से भेंट की और यहां स्वतंत्रता आंदोलन की जानकारी ली। यहां से जाने के बाद भी गांधी जी मेरठ के स्वतंत्रता सेनानियों के संपर्क में रहे और आंदोलन की जानकारी लेते रहे।
महात्मा गांधी के मेरठ दौरे से पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में राजनीतिक चेतना फैली और स्वतंत्रता आंदोलन तेज हुआ। गांधीजी के मेरठ दौरों को लेकर डॉक्यूमेंट्री बनवाई गई है। इसका छात्र-छात्राओं को बहुत लाभ हो रहा है। -प्रो. केके शर्मा, इतिहास विभागाध्यक्ष सीसीएसयू