मेरठ। किन्नर अखाड़े में महामंडलेश्वर बनना बहुत कठिन कार्य है। धार्मिक शिक्षा, वेदों और पुराणों का ज्ञान रखने वाला संन्यासी ही महामंडलेश्वर बन सकता है। इस पद को हासिल करने के पीछे संतों की सालों की तपस्या होती है। यह बात किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर नितिका जैन जी महाराज ने कही। उन्होंने नागरिकता संशोधन कानून का समर्थन किया।
महामंडलेश्वर नितिका जैन जी महाराज ने बताया कि किन्नर अखाड़े में संन्यासी का जीवन परिश्रम से भरा होता है। मादक पदार्थों से संन्यासी दूर रहते हैं। भगवान शिव के अर्द्धनारीश्वर स्वरूप की आराधना की जाती है। उन्होंने बताया कि साउथ इंडिया के किन्नर इरावन की पूजा करते हैं। उन्होंने बताया कि वह रामायण, गीता सहित चारों वेदाें को पढ़ चुकी हैं। साथ ही उन्होंने कुरान भी पढ़ी है। गीता को उन्होंने आम लोगों के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण ग्रंथ बताया। उन्होंने कहा कि आज के समय में गीता का ज्ञान ही मनुष्य को सही दिशा प्रदान करता हैं। उनकी टीम के कई किन्नर को प्रतिदिन वह गीता पाठ कराती हैं। महामंडलेश्वर नितिका जैन जी महाराज ने बताया कि उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से बीए और एमए किया। साथ ही स्वाध्याय से धार्मिक ज्ञान अर्जित किया। चारों धाम और 12 ज्योर्तिलिंग के वह दर्शन कर चुकी हैं। सोमनाथ ज्योर्तिलिंग के उन्होंने सर्वप्रथम दर्शन किए थे। समय समय पर किन्नरों को धार्मिक प्रवचन भी देती हैं।