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हमें भी है मुख्यधारा से जुड़ने का अधिकारः रिंकी

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मेरठ। किन्नर समाज को भी मुख्य धारा में शामिल होने का अधिकार है। लोगों की सोच बदली है, लेकिन आज भी बड़ी संख्या में लोग किन्नर समाज को हेय दृष्टि से देखते हैं। दिल्ली की पांच प्रमुख समाजसेवी संस्थाओं के साथ कार्य कर रही किन्नर रिंकी ने यह बात कहते हुए एलजीबीटी का समर्थन किया। उन्होंने बताया कि उनके कई किन्नर साथी अन्य पुरुष और महिलाओं के साथ रहकर विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं।
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समाजसेवी रिंकी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने सेक्शन 377 को असंवैधानिक कहा है। रिंकी ने एलजीबीटी का समर्थन करते हुए कहा कि थर्ड जेंडर को भी मुख्य धारा में दिल से शामिल किया जाना चाहिए। आज हम वोट करते हैं। राजनीति, शिक्षा, चिकित्सा, समाजसेवा सभी क्षेत्रों में अहम भूमिका अदा कर रहे हैं। ऐसे में बहुत बड़ा तबका ऐसा है जो सिर्फ यह सोचता है कि किन्नर समाज सिर्फ बधाई मांगकर ही अपना जीवन यापन करता है।
शिक्षा के अभाव में समाज पिछड़ा
शिक्षा के अभाव में किन्नर समाज पिछड़ गया। ऐसे में कई सामाजिक संगठनों ने आगे आकर किन्नर समाज को शिक्षा के महत्व को समझाया। समाजसेवी रिंकी ने बताया कि वह अभिव्यक्ति फाउंडेशन, मित्र ट्रस्ट, किन्नर भारती, सृजन फाउंडेशन और चाइल्ड सर्वावाइवल के साथ कार्य कर रहीं है। उन्होंने बताया सरकार की नीतियों से किन्नर समाज को आगे बढ़ने में मदद मिली है।
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एनसीआर में 44 हजार किन्नर
समाजसेवी रिंकी ने बताया कि पश्चिम उत्तर प्रदेश सहित दिल्ली एनसीआर में लगभग 44 हजार किन्नर हैं। जिला मेरठ में लगभग 600 किन्नर रह रहे हैं। किन्नर समाज में नई पीढ़ी शिक्षा के चलते आगे बढ़ी है। किन्नर समाज की परंपरा और समाज के दृष्टिकोण के कारण किन्नर समाज पूर्व में कोई बड़ा मुकाम हासिल नहीं कर पाया। अब समाज के लोग हर क्षेत्र में सक्रिय हैं। नई पीढ़ी में 80 प्रतिशत शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
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