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महादेव ने संसार की रक्षा के लिए किया हलाहल विष का पान

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श्रीमद् भागवत कथा सुनाते कथा व्यास स्रोत संवाद
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- शिव और राम की भक्ति में कभी मत करना भेद
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हस्तिनापुर। कस्बे के श्री कृष्ण मंदिर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन कथा व्यास ने ध्रुव चरित्र, भरत चरित्र की कथा का वर्णन करते हुए कहा कि जिनके जीवन में महादेव की भक्ति नहीं है, उसके ऊपर श्रीराम और कृष्ण का सानिध्य असंभव है।
श्रीमद्भागवत कथा में तीसरे दिन वृंदावन से आए कथा व्यास बालयोगी पचौरी महाराज ने कहा कि सत्संग से हमारा आचरण उत्तम बनता है। ध्रुव चरित्र से हमें सीखना चाहिए कि हमें हमारे लिए कहे गए अपमानित शब्दों से भी प्रेरणा लेना चाहिए। किसी के बुरे आरोप का जवाब हमें कुछ अच्छा करके देना चाहिए। परमात्मा परिश्रम साध्य नहीं कृपा साध्य है। इसलिए भगवान शिव और राम की भक्ति में भेद नहीं करना चाहिए। हरि-हर एक है।
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भगवान महादेव ने संसार की रक्षा के लिए भयंकर हलाहल विष का पान किया था। उस विष का इतना तीक्ष्ण आवेश होने के कारण तांडव नृत्य किया। सभी जीवों के उद्धार एवं करुणा के लिए करुणावतार भगवान शिव हैं। भक्त ध्रुव की भक्ति देखकर हरि की कृपा मिली। उन्होंने कथा का वर्णन करते हुए आगे कहा कि मानव हृदय ही संसार सागर है, जिसमें अच्छे और बुरे विचारों का मंथन चलता रहता है। बच्चों को बचपन में ही धर्म का ज्ञान देना चाहिए, क्योंकि बचपन में सीखा गया ज्ञान जीवन भर याद रहता है। कथा का शुभारंभ श्रीमद् भागवत की आरती के साथ हुआ। कथा में श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। इस अवसर पर डॉ. डीडी त्यागी, सुनील त्यागी, भूपेंद्र कुमार आदि का सहयोग रहा।

श्रीमद् भागवत कथा सुनाते कथा व्यास स्रोत संवाद

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