उपलों और कोयले पर बन रही बिरयानी
नई बस्ती निवासी अब्बास स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के पास बिरयानी का ठेला लगाते हैं। उन्होंने बताया कि अब घर पर उपलों और कोयले पर वेज बिरयानी तैयार करनी पड़ रही है। ठेले पर पांच किलो का सिलेंडर केवल गर्म करने के लिए इस्तेमाल करते थे, लेकिन अब वह भी मुश्किल से मिल रहा है। आसपास कई चाय और चाट के ठेले बंद हो चुके हैं।
रिश्तेदारों से सिलेंडर लेकर चल रहा काम
शिवपुरम निवासी महेश कुमार का स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के पास चाट और मुरादाबादी दाल का ठेला है। उन्होंने बताया कि फिलहाल पड़ोसियों और रिश्तेदारों से घरेलू सिलेंडर मांगकर किसी तरह काम चला रहे हैं। घर पर लकड़ी और कोयले की भट्टी लगा दी है, लेकिन महंगाई के कारण कई लोगों ने फास्ट फूड का काम ही बंद कर दिया है।
लागत बढ़ी, मुनाफा लगभग खत्म
देवतापुरम निवासी ओमवीर दिल्ली रोड स्थित ध्यानचंद नगर के पास बिरयानी का ठेला लगाते हैं। उन्होंने बताया कि ब्लैक में सिलेंडर 2500 रुपये तक मिल रहा है, जिससे लागत काफी बढ़ गई है। इसके बावजूद ग्राहकों को बनाए रखने के लिए प्लेट की कीमत अभी भी 20 से 30 रुपये ही रखी है। उनका कहना है कि यदि यही स्थिति रही तो वे शिकंजी या जलजीरा का ठेला लगाने को मजबूर होंगे।
शहर में स्ट्रीट फूड कारोबार पर संकट
कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की किल्लत और घरेलू सिलेंडर की निर्धारित समय अवधि के कारण शहर में स्ट्रीट फूड कारोबार पर संकट गहराता जा रहा है। कंकरखेड़ा, गंगानगर, जागृति विहार और गढ़ रोड जैसे इलाकों में भी कई स्ट्रीट फूड वेंडरों ने अपने ठेले बंद कर दिए हैं। छोटे व्यापारियों का कहना है कि यदि जल्द ही गैस की आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो शहर के स्ट्रीट फूड कारोबार पर बड़ा असर पड़ सकता है।