विधानसभावार देखें तो किठौर के मतदाता अधिक जागरूक दिखे। इस विधानसभा क्षेत्र में कुल 396 बूथ बनाए गए थे। यहां न सिर्फ 70 प्रतिशत से अधिक मतदान करने वालों की संख्या अधिक थी, बल्कि 50 प्रतिशत से कम मतदान करने वालों की संख्या भी अन्य विधानसभा क्षेत्रों के मुकाबले काफी कम थी। किठौर में 52 बूथों पर 70 प्रतिशत से अधिक और मात्र 13 बूथों पर 50 प्रतिशत से कम मतदान हुआ।
कमोबेश यही हाल मेरठ शहर का रहा। शहर में बूथों की संख्या 323 थी। इसमें 46 बूथों पर मतदाताओं ने 70 प्रतिशत से अधिक मतदान किया। 17 बूथों पर मतदान का प्रतिशत 50 से कम था।
इस मामले में सबसे खराब प्रदर्शन कैंट क्षेत्र का था। कैंट क्षेत्र में 439 कुल बूथ थे। इसमें मात्र 22 बूथ ऐसे थे जहां 70 प्रतिशत से अधिक और 92 बूथ ऐसे थे जहां 50 प्रतिशत से कम मतदान हुआ।
मेरठ दक्षिण में मतदाताओं में जागरूकता की कमी दिखी। यहां कुल बूथों की संख्या 489 थी। इनमें से 74 मतदान केंद्र ऐसे थे जहां पर 50 प्रतिशत से कम मतदान हुआ। जबकि 28 बूथों पर 70 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं ने लोकतंत्र के पर्व में अपनी भागीदारी निभाई।
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मंजूर की तीसरी पीढ़ी भी खुद को साबित करने में जुटी
किठौर में मंजूर अहमद की तीसरी पीढ़ी भी खुद को साबित करने के लिए मैदान में दिखी। मंजूर अहमद की विरासत शाहिद मंजूर संभाल रहे हैं और वह मौजूदा समय में किठौर से विधायक हैं। शाहिद मंजूर के बेटे नवाजिश मतदान बढ़वाने के लिए पिता के साथ कदमताल करते दिखे।
शाहिद मंजूर का वोट राजकीय कन्या इंटर कालेज के बूथ नंबर 97 पर था। इस बूथ पर 1294 वोट थे जिसमें से 908 वोट पड़े। प्रतिशत में गणना करें तो 70.17 प्रतिशत मतदान इस बूथ पर हुआ। नवाजिश का वोट मौलाना अबुल कलाम आजाद जूनियर हाई स्कूल के बूथ नंबर चार पर था।
यहां 1020 मतों में से 735 मत यानी 72.06 प्रतिशत मत पड़े। शाहिद मंजूर के मुकाबले उनके बेटे के क्षेत्र में मतदान अधिक हुआ। अब किस बूथ पर किसने अपने उम्मीदवार को अधिक मत दिलाने में कामयाबी हासिल की यह 4 जून को नतीजे आने के बाद पता चलेगा।