1977 में उस समय के प्रमुख जाट नेता और जिला पंचायत अध्यक्ष रहे वरुण सिंह कांग्रेस के टिकट पर लड़े। इस चुनाव में में वह लोकदल के सईद मुर्तजा से चुनाव हार गए। 1998 में जिले के बड़े जाट नेता हरेंद्र मलिक ने सपा से चुनाव लड़ा और वह भाजपा के सोहनवीर सिंह से चुनाव हार गए। 2009 के लोकसभा चुनाव में उस समय जिले की राजनीति में वर्चस्व स्थापित करने वालीं अनुराधा चौधरी रालोद से चुनाव लड़ीं। उन्हें बसपा के कादिर राना से हार का मुंह देखना पड़ा। 2019 में इस बार रालोद प्रमुख चौधरी अजित सिंह की मैदान में उतरने की तैयारी है। इस सीट पर सभी की निगाहें टिकी हैं। इस बार इतिहास दोहराया जाएगा या नया इतिहास बनेगा, यह तो रिजल्ट से ही तय होगा।
भाजपा के जाट प्रत्याशी चार बार जीते
लोकसभा की राजनीति में जाट प्रत्याशी के रूप पहली बार 1991 में भाजपा के नरेश बालियान चुनाव जीते थे। उन्होंने तब जनता दल के मुफ्ती मोहम्मद सईद को चुनाव में हराया था। 1996 में भाजपा के ही सोहनवीर सिंह ने सपा के संजय सिंह को पराजित किया। 1998 के लोकसभा चुनाव में एक बार फिर सोहनवीर सिंह सपा के हरेंद्र मलिक को पराजित कर विजयी हुए। 2014 में भाजपा के डॉ. संजीव बालियान ने फतह हासिल की। इस सीट पर जीतने वाले चारों जाट प्रत्याशी भाजपा के ही रहे हैं।
शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें
https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/