सोमवार को ही शहर में अंबाला रोड पर कांग्रेस के वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष इमरान मसूद के आवास पर बैठक हुई, जिसमें पूर्व केंद्रीय मंत्री काजी रशीद मसूद और उनके बेटे शाजान मसूद तथा पौत्र शायान मसूद ने पहुंचकर पुराने सभी विवाद समाप्त कर लिए। काजी रशीद मसूद ने इमरान मसूद और शाजान मसूद के सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिया और एकजुट होकर आगामी लोकसभा चुनाव में इमरान को जिताने की अपील की।
सात साल बाद काजी परिवार में एकता हुई। अब इस परिवार की एकता को लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। सपा-बसपा गठबंधन को भी नए सिरे से अपनी रणनीति बनानी होगी, तो भाजपा अपने हिसाब समीकरण साधने होंगे।
साधे जाएंगे जातीय समीकरण
आगामी चुनाव के लिए सपा-बसपा गठबंधन में अनुसूचित जाति और मुस्लिम मतदाताओं का गठजोड़ मजबूत माना जा रहा था। अभी तक काजी रशीद मसूद भी बसपा में ही थे, लेकिन काजी परिवार एकजुट होने से इमरान मसूद इसी प्रयास में रहेंगे कि आगामी चुनाव में मुस्लिम मतदाताओं को एकजुट कर अपने पक्ष में किया जाए।
इसके साथ ही इमरान मसूद ने समय समय पर भीम आर्मी का साथ दिया था, जिससे उनका प्रयास रहेगा कि अनुसूचित जाति के मतदाताओं को लुभाया जा सके। यदि इमरान मसूद अपने प्रयास में कामयाब हो जाते हैं, तो चुनावी समीकरण बदले नजर आएंगे।
क्योंकि सहारनपुर सीट पर 17 लाख मतदाताओं में से करीब 6 लाख मुस्लिम और तीन लाख अनुसूचित जाति के मतदाता बताए जाते हैं। यह भविष्य तय करेगा कि काजी परिवार अपनी रणनीति में कितना कामयाब होता है।
तो फिर होगा हसन परिवार से मुकाबला
2018 में कैराना लोकसभा के उपचुनाव में रालोद प्रत्याशी तबस्सुम हसन ने जीत दर्ज की थी, जबकि भाजपा की मृगांका सिंह चुनाव हारी थीं। उस चुनाव में बसपा और कांग्रेस की तरफ से प्रत्याशी नहीं उतारा गया था। इससे पहले 2009 के लोकसभा चुनाव की बात करें, तो तब शाजान मसूद ने सपा प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा था, तो उस दौरान तबस्सुम हसन बसपा प्रत्याशी थीं।
अब आगामी चुनाव में सपा-बसपा के गठबंधन में कैराना लोकसभा सीट सपा के खाते में गई है। कैराना से समाजवादी पार्टी की तरफ से सांसद तबस्सुम हसन अथवा उनके बेटे विधायक नाहिद को प्रबल प्रत्याशी माना जा रहा है। यदि सपा ने हसन परिवार को चुनाव में उतारा, तो कैराना क्षेत्र में शामिल नकुड़ और गंगोह विधानसभा क्षेत्र को लेकर फिर से काजी परिवार से मुकाबला होगा।