सूत्रों का कहना है कि 38-38 सीटों के फार्मूले में बसपा अपने कोटे की 38 सीटों में से कोई भी सीट किसी भी सहयोगी दल को देने को तैयार नहीं है। ऐसे में रालोद की मांग को पूरा करने के लिए सपा को ही अपने कोटे की सीटें कम करनी होगी। मायावती से मुलाकात के बाद बुधवार को अखिलेश यादव की मुलाकात रालोद के राष्ट्रीय महासचिव जयंत चौधरी से होनी है। इस बैठक के बाद ही पूरी राजनीतिक तस्वीर साफ हो सकेगी।
चार सीटों पर ही बचेगी रालोद की मान्यता: रालोद को दल की मान्यता बचाने के लिए कम से कम चार सीटों पर लड़ना अनिवार्य है। अगर वह इससे कम सीटों पर लड़ेगा तो दल की मान्यता खतरे में पड़ेगी। गठबंधन को भी इसकी जानकारी दी जा चुकी है। इसके चलते ही पार्टी को चार सीटें मिलने की संभावना बनती दिख रही है।
निकाला जा रहा फॉर्मूला
मुजफ्फरनगर सीट को बसपा के हिस्से में बताया जा रहा है, लेकिन गठबंधन के साथियों के लिए बसपा इस सीट को छोड़ देगी। इसके बदले बसपा को कोई दूसरी सीट मिलेगी।
वेस्ट में रखते हैं प्रभाव
रालोद का परंपरागत जाट वोटर वेस्ट यूपी की 16 सीटों को प्रभावित करता है। सहारनपुर, कैराना, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बागपत, बिजनौर, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, मुरादाबाद, संभल, अमरोहा, बुलंदशहर, हाथरस, अलीगढ़, नगीना, फतेहपुर सीकरी, फिरोजाबाद पर प्रभाव है। सपा-बसपा गठबंधन में रालोद के शामिल होने पर वेस्ट यूपी की तमाम सीटों पर गहरा असर पड़ेगा। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि सपा-बसपा गठबंधन नहीं चाहेगा कि वह रालोद को छोडे़।
बागपत से जयंत, मुजफ्फरनगर से अजित सिंह
चुनाव में अभी कई समीकरण बदलेंगे। लेकिन सपा-रालोद का गठबंधन करीब-करीब तय है। बागपत से इस बार रालोद उपाध्यक्ष जयंत चौधरी उम्मीदवार होंगे। मुजफ्फरनगर सीट रालोद के हिस्से में आने पर रालोद अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह चुनाव लड़ेंगे।
चारु के चुनाव लड़ने की संभावना कम
रालोद उपाध्यक्ष जयंत चौधरी की पत्नी चारु चौधरी के चुनाव मैदान में उतरने की संभावना इस बार कम है। रालोद के कार्यकर्ताओं ने मथुरा से भाजपा के सामने चारु को चुनाव लड़ाने का प्रस्ताव रखा था, जिसे हाईकमान ने फिलहाल खारिज कर दिया है। जिस कारण इस बार मथुरा से रालोद के सिंबल पर सपा के किसी नेता के चुनाव लड़ने की संभावना है।
शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें
https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/