बसपा थिंक टैंक द्वारा देखा जा रहा है कि यहां का मिजाज इस बार क्या कह रहा है। जातिगत आंकड़ों पर काम चल रहा है। अनुसूचित जाति के वोटरों के साथ मुस्लिम समीकरण तो लग रहा है। लेकिन यहां अन्य जाति के वोटों को गठबंधन कितना ले सकता है, इस पर भी गणित लगाया जा रहा है। बसपा सपा यह भी देख रही है कि रालोद के पारंपरिक जाट वोटर गठबंधन को कितना वोट करेंगे। वहीं, दूसरे वर्गों में कितनी सेंध लगाई जा सकती है।
इन सभी बिंदुओं पर जोन कोऑर्डिनेटर सत्यपाल पेपला, शाहजहां सैफी, डॉ. कमल सिंह राज को लखनऊ बुलाकर चर्चा हुई। जातिगत समीकरणों के साथ पूछा गया कि भाजपा प्रत्याशी के लगातार दो बार जीतने के कौन से कारण मुख्य रहे। बसपा और सपा प्रत्याशी पर किन-किन जातियों का रुझान ज्यादा रहा। इन पर रिपोर्ट मांगी गई। वहीं महापौर चुनाव के फार्मूले पर भी मंथन हुआ। जिसमें मेरठ महापौर पद पर बसपा ने भाजपा को मात दी थी। कहा गया कि इसी फार्मूले पर मजबूती से काम किया जाए।
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