पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सहारनपुर समेत कई जिलों में ब्रिटिशकाल में डाकू सुल्ताना के खौफ से ब्रिटिश शासनकाल में थानों की स्थापना हुई थी। 1868 में सहारनपुर पुलिस लाइन बनाई गई थी। इतिहास के पन्नों पर इसका ब्योरा काफी विस्तृत है।
जानकार बताते हैं कि ब्रिटिश शासन में डाकुओं का पश्चिमी उत्तर प्रदेश में काफी आतंक था। अंग्रेजी शासक भी डाकुओं से भयभीत थे। उस समय अपराध कम थे, लेकिन दस्यु गिरोह ज्यादा सक्रिय थे। आजादी के दीवाने भी अपनी ताकत से अंग्रेजों के पांव उखाड़ रहे थे। डाकुओं से सुरक्षा और आंदोलनकारियों पर दबाव बनाने के लिए थानों की स्थापना करनी पड़ी थी। तब देहरादून और हरिद्वार सहारनपुर जिले के का हिस्सा हुआ करते थे। मुजफ्फरनगर भी जिला नहीं था। वेस्ट यूपी का लंबा चौड़ा क्षेत्र मेरठ कमिश्नरी के अंतर्गत आता था। जिले में पुलिस लाईन के भवन का निर्माण 1868 में हुआ था। इसका प्रमाण आंकिक कार्यालय के द्वार पर लगा शिलापट है। पुलिस अधीक्षक कार्यालय की स्थापना 1909 में हुई थी। फिर 1907 में थाना बड़गांव, 1912 में थाना चिलकाना, बिहारीगढ़, मिर्जापुर, नकुड़, गंगोह कोतवाली, नगर कोतवाली, देहरादून कोतवाली, हरिद्वार व रुड़की थाने बनाए गए थे। देश आजाद होने के बाद आबादी बढ़ने के साथ अन्य थानों की स्थापना हुई थी।