2017 के विधान सभा चुनाव में उनकी बेटी मृगांका सिंह को विधानसभा का टिकट दिया लेकिन वह नाहिद हसन से चुनाव हार गईं। मृगांका को टिकट दिलाए जाने से नाराज हुकुम सिंह के पोते अनिल चौहान रालोद के टिकट पर चुनाव लड़े थे, जिसका नुकसान मृगांका को उठाना पड़ा। हुकुम सिंह के निधन से रिक्त हुई लोकसभा सीट पर 2018 में हुए उप चुनाव में भाजपा ने मृगांका को टिकट दिया।
इस चुनाव में खुद मुख्यमंत्री और सत्ता के कई दिग्गज मंत्री तक यहां डेरा डाले रहे, लेकिन इसके बाद भी मृगांका नहीं जीत सकी। इसका पार्टी में काफी गलत मैसेज गया। पार्टी द्वारा कराए गए सर्वे और कमजोर टीम को टिकट कटने की वजह माना जा रहा है। कैराना लोकसभा सीट पर टिकट के लिए कई दावेदार थे। इनमें मृगांका के अलावा, गंगोह विधायक प्रदीप कुमार का भी मजबूत दावा था।
इसके अलावा सपा नेता एमएलसी गुर्जर नेता विरेंद्र सिंह का नाम सबसे ज्यादा चर्चाओं में था। पार्टी भी कई दिन तक असमंजस में थी। प्रदीप चौधरी ने यही तर्क पार्टी हाईकमान को दिया। बताया गया कि यदि उन्हें टिकट दिया जाए तो गंगोह में वह मजबूत हो जाएंगे और नुक्कड़ में भी असर पड़ेगा।