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लोकसभा चुनाव 2019: गठबंधन से पथरीली होगी भाजपा की राह, यहां मिलेगी कड़ी टक्कर

Wed, 06 Mar 2019 10:49 AM IST
Dimple Sirohi राजदीप जाखड़, अमर उजाला, मेरठ
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सपा-बसपा गठबंधन
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सपा-बसपा-रालोद के गठबंधन से बना मुस्लिम-जाट-अनुसूचित जाति समीकरण पश्चिमी यूपी में भाजपा को कड़ी टक्कर देगा। यह गठबंधन कैराना लोकसभा उपचुनाव में ट्रेलर दिखा चुका है, जहां केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकार पूरी ताकत लगाने के बाद भी रालोद प्रत्याशी तबस्सुम हसन को नहीं रोक पाई थी। गठबंधन में तीनों दल आने से कार्यकर्ताओं में उत्साह का संचार हो गया है। 

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वेस्ट यूपी में करीब 15 सीटों पर जाट वोटों की बड़ी भूमिका रहती है। एक जमाने में चौधरी चरण सिंह के बनाए ‘मजगर’ (मुसलमान-जाट-गुर्जर-राजपूत) समीकरण ने प्रदेश की राजनीति में बड़ा उलटफेर करते हुए उन्हें न केवल प्रदेश में दो बार सीएम बनाया था, बल्कि बाद मेें देश के शीर्ष पद प्रधानमंत्री तक पहुंचाया था। 

मरते दम तक बड़े चौधरी ने इस समीकरण को एक छतरी के नीचे बनाए रखा। लेकिन उनके जाने के बाद उनके पुत्र चौधरी अजित सिंह ऐसा नहीं कर सके, और यह समीकरण छिन्न-भिन्न होकर भाजपा और सपा के साथ शिफ्ट हो गया। हालांकि मुस्लिम-जाट बेस  मतदाताओं के दम पर रालोद की पश्चिमी यूपी की कुछ सीटों पर उपस्थिति बनी रही।

इन सीटों के दम पर रालोद न केवल मुलायम सरकार में भागीदार भी रहा, बल्कि पार्टी सुप्रीमो चौधरी अजित सिंह भाजपा की वाजपेयी सरकार में केंद्रीय कृषि मंत्री भी बने। लेकिन पश्चिमी यूपी की इस प्रभावशाली पार्टी को उस समय झटका लगा, जब 2013 में मुजफ्फरनगर दंगा हुआ। इस दंगे ने पार्टी के सर्वाधिक मजबूत आधार जाट-मुस्लिम को अलग कर दिया। इसका असर ही रहा कि 2014 के लोकसभा चुनाव में पार्टी कोई सीट नहीं जीत सकी। 

चौधरी अजित सिंह और उनके बेटे जयंत चौधरी भी चुनाव हार गए। विधानसभा चुनाव 2017 में भी पार्टी को केवल एक सीट मिली। पार्टी के छितरे जाट-मुस्लिम समीकरण को एक करने के लिए चौधरी अजित सिंह और जयंत चौधरी ने क्षेत्र में जन संवाद और सांप्रदायिक सौहार्द सम्मेलन किए।

इसका परिणाम रहा कि पार्टी कैराना लोकसभा उपचुनाव गठबंधन के दम पर जीतने में कामयाब रही। सपा-बसपा गठबंधन में शामिल होने या नहीं होने की उहापोह के बीच मंगलवार को इस पर विराम लग गया।

रालोद को गठबंधन में शामिल कर तीन सीट बागपत, मुजफ्फरनगर और मथुरा दे दी गईं। राजनीतिक पंडितों का कहना है पश्चिमी यूपी में तीनों वर्गों (मुस्लिम-जाट-अनुसूचित जाति) की थोक वोट होने के चलते यह भाजपा पर भारी पड़ेगा। 

एक और सीट लेने की जुगत
गठबंधन में रालोद को तीन सीट बागपत, मुजफ्फरनगर और मथुरा देने की घोषणा हो चुकी है लेकिन पार्टी एक सीट पर और दावा जता रही है। सूत्रों के मुताबिक पार्टी का दावा बुलंदशहर और हाथरस की आरक्षित सीट के अलावा बिजनौर या अमरोहा पर है। चौथी सीट पर रालोद प्रत्याशी को सपा या बसपा के सिंबल पर लड़ाए जाने की संभावना भी जताई जा रही है। 

रालोद-सपा-बसपा कार्यकर्ताओं ने मनाई खुशी
सपा-बसपा गठबंधन में रालोद के शामिल होने के औपचारिक एलान के बाद तीनों दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने शाम को कमिश्नरी पार्क में एकत्रित होकर खुशी मनाई। पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह और बाबा साहब डॉ भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इसके बाद तीनों दलों की संयुक्त बैठक बसपा कार्यालय पर हुई। मंडलीय बैठक में नेताओं ने कहा कि गठबंधन यूपी जीतकर नया रिकॉर्ड बनाएगा। प्रदेश से भाजपा का सूपड़ा साफ हो जाएगा। 

मंगलवार को पूर्व सीएम एवं सपा प्रमुख अखिलेश यादव और रालोद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जयंत चौधरी ने लखनऊ में साझा प्र्रेस कॉन्फ्रेंस कर सपा-बसपा गठबंधन में रालोद के शामिल होने की औपचारिक घोषणा की। घोषणा होते ही तीनों दलों के जिलाध्यक्ष, वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता कमिश्नरी पार्क पहुंच गए और एक दूसरे के गले मिलकर बधाई दी। 

लड्डू बांटकर एक दूसरे का मुंह मीठा कराया। बसपा जिलाध्यक्ष सुभाष प्रधान के बुलावे पर रालोद और सपा नेता बसपा कार्यालय पर पहुंच गए और यहां पर बसपा के वेस्ट यूपी प्रभारी सुनील चित्तौड़ के साथ मिलकर संयुक्त बैठक की। सुनील चित्तौड़ ने कहा कि यह गठबंधन भाजपा का सफाया कर देगा। चित्तौड़ ने सभी दलों के नेताओं से जी जान से चुनाव में जुटने का आह्वान किया। 
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सपा जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह, रालोद के प्रदेश संगठन प्रभारी डॉ. राजकुमार सांगवान, जिलाध्यक्ष राहुल देव, प्रदेश महासचिव एनुद्दीन शाह, नरेंद्र खजूरी ने कहा कि ये किसानों, शोषितों, मजदूरों और नौजवानों के हक में बना गठबंधन हैं जो भाजपा की चूल हिला देगा।

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