बसपा नेता पूर्व सांसद कादिर राना ने कहा कि मुकाबले को आसान न समझे बहुत बड़ी लड़ाई है। चौधरी अजित सिंह ने खाई में आकर कूदने का काम किया है। इससे दोनों समाजों के बीच बनी खाई भरेगी। सपा जिलाध्यक्ष गौरव स्वरूप, बसपा जिलाध्यक्ष सतपाल, बसपा के पूर्व विधायक अनिल कुमार, राम निवास पाल, सपा पूर्व जिलाध्यक्ष प्रमोद त्यागी, सतेंद्र सैनी, मुफ्ती जुल्फिकार, पूर्व मंत्री उमाकिरण, मुकेश चौधरी, पूर्व विधायक मिथलेश पाल, सत्यवीर प्रजापति, रालोद नेता पूर्व मंत्री धर्मवीर बालियान, योगराज सिंह, पूर्व विधायक मुश्ताक चौधरी, नवाजिश आलम, पूर्व सांसद अमीर आलम खान, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष तरसपाल मलिक, रमा नागर, राष्ट्रीय सचिव ब्रहमसिंह बालियान, सुधीर भारतीय, कंवरपाल फौजी, अभिषेक चौधरी, विदित मलिक, पराग चौधरी आदि मौजूद रहे। संचालन रालोद जिलाध्यक्ष अजीत राठी ने किया।
जिले को दिलाएंगे पहचान
रालोद अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह ने अपने भाषण का फोकस मुजफ्फरनगर पर रखा। उन्होंने कहा कि इस जिले की पहचान पूरे देश में नंबर एक पर प्रति व्यक्ति आय होने, सबसे ज्यादा ट्रैक्टर होने और लोहे की फैक्ट्रियां होने के कारण रही है। दंगे के बाद यह बर्बादी के कगार पर पहुंच गया। जिस जिले में 1947, 1992 में भी दंगा नहीं हुआ, उसमें 2013 में दंगा हो गया। अब आगे ऐसा नहीं होने देंगे। जिले को उसकी पहचान वापस दिलाऊंगा।
मेरे दरवाजे पर पुलिस का पहरा नहीं
चौधरी अजित सिंह ने कहा कि दिल्ली में उनके आवास पर कभी पुलिस का पहरा नहीं रहा है। मेरे घर आने के बाद मुझसे मिलने के लिए किसी संघर्ष की जरूरत नहीं पड़ेगी। जो जब चाहे उनसे मिलने दिल्ली आ सकता है। अजित सिंह ने जनता में चल रही उस चर्चा का खंडन किया कि घर पर मिलने के लिए बाधाओं का सामना करना पड़ेगा।
...और गुस्से में खड़े हो गए अजित सिंह
कार्यक्रम के दौरान अजित सिंह के चारों ओर काफी भीड़ एकत्र हो गई। जब धमकाने के बाद भी लोग नहीं माने तो अजित सिंह को गुस्सा आ गया और कुछ लोगों को धक्का देकर उन्होंने पीछे हटाया। इसके बाद रालोद कार्यकर्ताओं ने भीड़ को पीछे धकेला।
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