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लोकसभा चुनाव फ्लैशबैक: मेहमान प्रत्याशियों को भी गले लगाते रहे हैं शामली के मतदाता

Fri, 22 Mar 2024 03:38 PM IST
Dimple Sirohi महबूब अली, संवाद न्यूज एजेंसी, शामली

सार

कैराना लोकसभा सीट का इतिहास काफी पुराना है। जिले की जनता लोकसभा चुनाव के दौरान हमेशा ही बड़ा दिल दिखाती रही है। 1962 से 2019 तक के चुनाव में तीन बार बाहरी प्रत्याशियों को पहली बार में ही संसद पहुंचाया है।
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कैराना सीट - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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रिम-धुरा और कृषि यंत्र बनाने के लिए प्रसिद्ध जिले की जनता का दिल बहुत बड़ा है। लोकसभा चुनाव में यहां के लोगों ने मेहमान प्रत्याशियों को वोट देकर खूब खातिरदारी की। उन्होंने बाहर से आकर चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों को सबसे बड़ी पंचायत में जिले का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना।

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कैराना लोकसभा सीट पर अब तक 15 बार चुनाव हो चुके हैं
जिले की जनता ने 1962 से 2019 तक के चुनाव में तीन बार बाहरी प्रत्याशियों को पहली बार में ही संसद पहुंचाया। 12 बार स्थानीय प्रत्याशियों को जिताया है। 1962 में अस्तित्व में आई कैराना लोकसभा क्षेत्र में शामली, कैराना, थानाभवन, नकुड़ और गंगोह विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं। सीट से सबसे पहले हरिद्वार के रु़ड़की के रहने वाले यशपाल सिंह ने चुनाव लड़ा था। लोगों ने बाहरी प्रत्याशी होने के बावजूद यशपाल सिंह को संसद पहुंचाया। यशपाल सिंह ने कांग्रेस के अजित प्रसाद जैन को हराया था।

1980 में पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की पत्नी गायत्री देवी ने जनता पार्टी एस पार्टी से चुनाव लड़ा। गायत्री देवी हरियाणा के सोनीपत के जिले की रहने वाली थीं। इसी तरह 2004 में दिल्ली की रहने वाली अनुराधा चौधरी ने यहां रालोद से चुनाव लड़ा। अनुराधा ने बसपा प्रत्याशी शाहनवाज को हराया। 
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यह भी पढ़ें: सपा को बड़ा झटका: पार्टी छोड़कर रालोद में शामिल हुए पूर्व जिला पंचायत सदस्य वीर सिंह मलिक

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अब तक कैराना के सांसद
सांसद चुने गए बाहरी प्रत्याशी
 वर्ष    प्रत्याशी     पार्टी प्राप्त वोट

 1962     यशपाल सिंह (निर्दलीय)   1,34,581
 1980     गायत्री देवी (जनता पार्टी एस)  2,03,242
 2004     अनुराधा चौधरी     5,23,923
    (रालोद-सपा गठबंधन)     

जीतने वाले स्थानीय उम्मीदवार
 1967     गय्यूर अली खान (सोशलिस्ट पार्टी)    76,415
 1971     शफक्कत जंग (कांग्रेस)    1,62,276
 1977    चंदन सिंह (बीएलडी)    2,42,500
 1984     चौधरी अख्तर हसन (कांग्रेस)    2,36,904
 1989     हरपाल पंवार  (जनता दल)    3,06,119
 1991     हरपाल पंवार (जनता दल)     2,23,892
 1996     मुनव्वर हसन (सपा)    1,84,636
 1998     वीरेंद्र वर्मा (भाजपा)    2,89,110
 1999     अमीर आलम (रालोद)    2,06,345
 2009     तबस्सुम हसन (बसपा)    2,83,259
 2014     हुकुम सिंह (भाजपा)    5,65,909
 2018     उपचुनाव तबस्सुम (हसन रालोद)     4,81,182
 2019     प्रदीप चौधरी (भाजपा)    5,66,961
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