कैराना लोकसभा सीट पर समाजवादी पार्टी की इकरा हसन को विरासत को आगे बढ़ाने की चुनौती होगी। वहीं, भाजपा प्रत्याशी प्रदीप चौधरी को दोबारा कमल खिलाने की चुनौती है। बसपा के प्रत्याशी श्रीपाल राणा का साख बचाने का प्रयास रहेगा।
लोकसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है। पलायन के मुद्दे से देशभर में चर्चाओं में आई कैराना लोकसभा सीट पर इस बार भी हर किसी की नजर लगी हुई है। इस समय सीट पर भाजपा का कब्जा है। इस सीट पर अभी चुनावी दंगल में तीन यौद्धा ही नजर आ रहे हैं।
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हसन परिवार की बेटी इकरा हसन के सामने इस बार जहां विरासत को बचाना चुनौतीपूर्ण है। वहीं सांसद प्रदीप चौधरी को जनता दल के लगातार दो बार सांसद रहे हरपाल सिंह के रिकाॅर्ड की बराबरी कर भाजपा को जीत दिलाना बड़ी चुनौती है। वहीं पहली बार चुनाव लड़ रहे बसपा के प्रत्याशी श्रीपाल राणा के सामने साख बचाना चुनौती रहेगी।
कैराना लोकसभा सीट की यदि बात की जाए तो यहां पर नामांकन का कार्य शुरू हो चुका है। आगामी 19 अप्रैल को इस सीट पर मतदान होगा। जिसकी तैयारी में सभी दलों के पदाधिकारी भी लगे हुए हैं। भाजपा ने इस सीट पर दोबारा से सांसद प्रदीप चौधरी को जहां चुनाव मैदान में उतारा है।
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वहीं सपा-कांग्रेस गठबंधन से हसन परिवार की बेटी इकरा हसन चुनाव मैदान में ताल ठोक रही है। इसी तरह बसपा ने सहारनपुर के जिले के भावसी निवासी रिटायर्ड बीएसएफ के जवान श्रीपाल राणा को प्रत्याशी बनाया है। हालांकि, नामांकन पूरा होने तक इस सीट पर प्रत्याशियों की संख्या बढ़ेगी।
प्रदीप चौधरी के सामने दोबारा से इस बार भी सीट पर कमल खिलाने की चुनौती है। क्योंकि सीट पर दो बार सिर्फ जनता दल के प्रत्याशी हरपाल पंवार वर्ष 1989 और 1991 में सांसद रहे थे। इसके बाद कोई भी प्रत्याशी इस सीट पर दो बार लगातार जीत दर्ज नहीं कर सका।
प्रदीप चौधरी यदि इस बार चुनाव जीतते हैं तो जनता दल के लगातार दो बार सांसद बनने के रिकार्ड की बराबरी कर लेंगे। प्रदीप चौधरी के पिता मास्टर कंवरपाल सिंह भी तीन बार नकुड़ विधानसभा से विधायक रह चुके हैं।
प्रदीप चौधरी खुद तीन बार विधायक रह चुके हैं। पिछले चुनाव में प्रदीप चौधरी ने सपा की तबस्सुम बेगम को हराया था। प्रदीप चौधरी को 566961 वोट मिले थे जबकि तबस्सुम को 474801वोट मिले थे। जबकि तीसरे नंबर पर कांग्रेस के हरेंद्र मलिक रहे थे, जिन्होंने 69355 मत हासिल किए थे।
हसन परिवार की बेटी इकरा हसन के सामने विरासत बचाने की चुनौती रहेगी। भाजपा के सांसद हुकुम सिंह की मौत के बाद वर्ष 2018 में उपचुनाव हुआ , जिसमें हसन परिवार की इकरा की मां तबस्सुम हसन ने रालोद से चुनाव लड़ते हुए 4,81,182 प्राप्त कर विजय हासिल की थी।
इससे पूर्व 2009 में भी तबस्सुम हसन ने बसपा से चुनाव लड़ा था और 2832590 मत हासिल कर जीत दर्ज की थी। 1996 में सपा से तबस्सुम हसन के पति मुनव्वर हसन ने चुनाव लड़ा था, उन्होंने 184636 मत प्राप्त कर जीत दर्ज की थी। इससे पूर्व वर्ष 1984 में मुनव्वर हसन के पिता चौधरी अख्तर हसन ने कांग्रेस से चुनाव लड़ते हुए जीत दर्ज की थी। इकरा के भाई नाहिद हसन वर्तमान में कैराना से विधायक हैं।
उधर, बसपा ने लोकसभा सीट पर सहारनपुर जिले के भावसी निवासी रिटायर्ड बीएसएफ के जवान श्रीपाल राणा को प्रत्याशी बनाया है। श्रीपाल राणा ने छ ह माह पूर्व ही बसपा ज्वाइन की थी। श्रीपाल राणा के सामने बसपा की साख बचाना चुनौती रहेगा।
अब देखना यह है कि प्रदीप चौधरी इस सीट पर फिर से कमल खिलाने में कामयाब होते हैं या फिर बसपा या सपा चुनाव परिणाम को पलटती है। मतगणना के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा।
भाजपा, सपा का भी खेल बिगड़ा सकती है बसपा और अन्य दल
बसपा ने इस बार कैराना लोकसभा सीट पर श्रीपाल राणा को उतारकर ठाकुर-दलित कार्ड खेला है। इस सि्थ्ति में बसपा को ठाकुर के साथ दलित, मुस्लिम और अन्य वर्गों का वोट मिलता है तो भाजपा और सपा का खेल भी बिगड़ सकता है। अन्य निर्दलीय और पार्टियों के प्रत्याशी भी भाजपा, सपा का खेल बिगाड़ सकते हैं।
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कैराना लोकसभा सीट में पांच विधानसभ शामली, कैराना, थानाभवन, नकुड़ और गंगोह शामिल हैं। इस सीट पर मतदाताओं की संख्या-17 लाख 19 हजार 11 वोट है।