मेरठ सीट पर ईवीएम और पोस्टल बैलेट सहित कुल 1216413 वोट पड़े। जिसमें भाजपा और बसपा प्रत्याशी को 11,67,639 वोट बांट लिए। बाकी बचे वोटों में से कांग्रेस के हरेंद्र अग्रवाल ने 34479 मत हासिल किए।
जबकि अन्य आठ प्रत्याशी अफजाल को 882, आरती अग्रवाल को 957, किरण आरसी जाटव को 512, धर्मेंद्र को 489, नासिर अली को 921, राजेश गिरि को 978, श्रवण अग्रवाल को 1025 और सहंसरपाल को 2215 वोट मिले। जबकि नोटा के नाम पर भी 6316 का आंकड़ा दर्ज हुआ। भाजपा और बसपा प्रत्याशी को छोड़ दें तो बाकि प्रत्याशी अपनी जमानत भी नहीं बचा पाए।
नोटा रहा चौथे नंबर पर, आठ प्रत्याशियों से आगे
मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट पर हार जीत को लेकर रात तक खींचतान होती रही। हार जीत में नोटा की भी अहम भूमिका रही। नोटा चौथे नंबर पर रहा। मतदान के दौरान 6316 लोगों ने नोटा का इस्तेमाल किया। अगर यह नोटा न दबता और हारने या जीतने वाले के पक्ष में डलता तो हार जीत में काफी फर्क पड़ सकता था। मेरठ में 11 प्रत्याशी थे।
सामान्य शब्दों में नोटा का मतलब यह होता है कि अगर मतदाता किसी प्रत्याशी को पसंद नहीं करता है तो वह नोटा का बटन दबाए। नोटा की बात करें तो ईवीएम पर 6271 लोगों ने नोटा दबाया और 45 लोगों ने पोस्टल वोट केजरिए नोटा का इस्तेमाल किया। कुल वोटों में से 0.52 प्रतिशत वोट नोटा पर पड़े। नोटा से नीचे रहने वाले प्रत्याशियों में बहुजन महापार्टियों के अफजाल को 882 वोट पड़े। शिवसेना की आरती अग्रवाल को 957 वोट पड़े।
कर्तव्य राष्ट्रीय पार्टी की किरन सी जाटव को 512 वोट, भारतीय जनता दल के धर्मेंद्र को 489 वोट, प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के प्रत्याशी नासिर अली खान को 921 वोट, सर्वोदय भारत पार्टी के राजेश गिरी को 978 वोट, निर्दलीय प्रत्याशी श्रवण कुमार अग्रवाल को 1025 वोट और निर्दलीय सेंसरपाल सिंह को 2215 वोट पड़े। तीन प्रत्याशी भाजपा के राजेंद्र अग्रवाल, गठबंधन के हाजी याकूब कुरैशी और कांग्रेस के हरेंद्र अग्रवाल ही नोटा से आगे रहे।
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