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लॉक डाउन: 75 करोड़ का बिका सैनिटाइजर, इनमें 80 फीसदी नकली

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मेरठ। शहर के हर गली मोहल्ले में बिकने वाले 80 प्रतिशत सैनिटाइजर नकली हैं। यह शहर के प्रमुख डिस्ट्रिब्यूटरों से हुई बातचीत में सामने आया है। शहर में 25 के आसपास ब्रांडेड प्रोडक्ट के सप्लायर्स हैं जो आज भी डिमांड को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में नॉन रजिस्टर्ड, नॉन ब्रांडेड आइटम बनाने वाली कंपनियां सैनिटाइजर के नाम पर स्प्रिट में पानी मिलाकर मोटा मुनाफा वसूल रही हैं।
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व्यापारियों और कारोबारियों के अनुसार शहर में ब्रांडेड और नॉन ब्रांडेड सैनिटाइजर कंपनियों ने लॉक डाउन की अवधि में 75 करोड़ से ज्यादा का कारोबार कर लिया। जबकि इनमें करीब 80 फीसदी सैनिटाइजर नकली बिक गया। इसके साथ ही पीपीई किट, मास्क और फेस शेड आदि का कारोबार भी 25 करोड़ के आसपास हुआ है। इनमें भी कई आइटम मानक के अनुसार नहीं हैं। ऐसे में शहर में सैनिटाइजर और इससे संबंधित सामान का कारोबार 100 करोड़ को पार कर गया है।
सैनिटाइजर गैलरी में नहीं होना चाहिए ब्लीचिंग पाउडर का प्रयोग
चरण लैब के निदेशक विपिन बंसल का कहना है कि हाइपोक्लोराइज और सैनिटाइजर में लोगों को अंतर समझने की आवश्यकता है। ब्लीचिंग पाउडर का सैनिटाइजर गैलरी में प्रयोग नहीं होना चाहिए। सड़कों की धुलाई या बिल्डिंग पर स्प्रे तक ही ब्लीचिंग पाउडर को सीमित रखना चाहिए। इसके मानव शरीर पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है। इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि कपड़े धोने के साबुन में अगर अधिक ब्लीचिंग पाउडर हो तो हाथ कट जाते हैं। ऐसे में अगर चेहरे, सिर, आंख या शरीर के अन्य अंगों पर यह जाएगा तो इसका क्या प्रभाव होगा।
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इस तरह के सैनिटाइजर का करें प्रयोग
- इथेनॉल युक्त सैनिटाइजर
- आईपीए या आईसोटॉप अल्कोहल 70 प्रतिशत
इन तरह बना रहे सैनिटाइजर
केमिकल प्रोडक्ट सप्लायर मनीष शर्मा का कहना है कि गली मोहल्लों में नकली सैनिटाइजर की बिक्री हो रही है। इसमें स्प्रिट, पानी, फ्लेवर और थोड़ी सी ग्लिसरीन से सैनिटाइजर किया जा रहा है। न कोई मानक हैं न कोई मापदंड। ऐसे में लोगों के जीवन से ये लोग खिलवाड़ कर रहे हैं।
इन बातों का रखें ध्यान
- सैनिटाइजर मेडिकल स्टोर या अधिकृत विक्रेता से खरीदें
- सैनिटाइजर खरीदते समय उसका बिल लेना न भूलें
- सैनिटाइजर की बोतल पर लिखे मानकों और उसका सर्टिफिकेशन चेक करें
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सैनिटाइजर की कीमत
ब्रांडेड 200 एमएल - 100, 250 रुपये
नॉन ब्रांडेड 1 लीटर - 150 रुपये
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कार्ड व्यापारियों ने शुरू किया सैनिटाइजर व्यापार
मेरठ कार्ड एसोसिएशन के महामंत्री लोकेश अग्रवाल का कहना है कि वेडिंग कार्ड का व्यापार बंद होने के कारण उन्होंने साइड बिजनेस के रूप से सैनिटाइजर का काम शुरू किया है। विकास बंसल और सुधीर अग्रवाल ने बताया कि व्यापारियों का करोड़ों का माल प्रतिबंध के चलते स्क्रैप में तब्दील हो गया है। काफी सामान को चूहों ने कुतर दिया है। बैंकों के ईएमआई भरने के लिए फोन आ रहे हैं।
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घरों में सैनिटाइजेशन को बनाया कारोबार
व्यापार में जहां एक रास्ता बंद हो जाता है तो दूसरा खुल जाता है। इसी का उदाहरण है शहर के कुछ व्यापारी जो लॉक डाउन पीरियड में घरों, दुकानों और कार्यालयों को सैनिटाइज कर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। इसके लिए व्यापारी फॉगिंग मशीन, मिस्ट मशीन या यूवी मशीन का प्रयोग कर रहे हैं। सिट्रोन हाइजीन के संचालक जयविंदर धारीवाल ने बताया कि उनकी टीम मेरठ सहित दिल्ली एनसीआर में काम कर रही है। सरकारी कार्यालयों के साथ अब दुकानों से भी अच्छी डिमांड आ रही है। फिट-4 सैनिटाइजेशन सर्विस के वरुण, ट्रेडिंग इन हैंड सैनिटाइजर सर्विस कंपनी की नेहा, सैनिटाइजर के डिस्ट्रिब्यूटर आकाश गोयल और चरण लेबोरेटरीज के संचालक विपिन बंसल का कहना है कि कोरोना काल में सैनिटाइजर और उससे जुड़े सामानों ने बेहतर बाजार दिया है। आने वाले दिनों में इसका प्रयोग और बढ़ेगा।
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