गरीब छात्रों का तो सपना ही टूट जाएगा
जिस तरह से एडेड कॉलेजों की तरफ बीसीआई का ऐसा रुख है, उससे आने वाले समय में एडेड कॉलेजों से एलएलबी ही खत्म हो जाएगी। सभी विभागों को सेल्फ फाइनेंस करना पड़ जाएगा। ऐसे में गरीब छात्र-छात्राओं का तो कानून की पढ़ाई करने का सपना ही टूट जाएगा। एडेड कॉलेजों में एलएलबी की फीस जहां नौ सौ रुपये है वहीं, विवि में अगले साल से तीन वर्षीय एलएलबी में 36365 रुपये फीस निर्धारित की है। दूसरे विवि में भी एलएलबी की फीस इससे ज्यादा ही है। हैरानी की बात ये है कि अभी तक भी किसी जनप्रतिनिधि ने भी कॉलेज में एलएलबी को लेकर बार काउंसिल ऑफ इंडिया में बात करने का भी प्रयास नहीं किया है।
ये है बीसीआई का नियम
बीसीआई हर तीसरे साल लॉ कॉलेजों का निरीक्षण करती है। निरीक्षण के दौरान कॉलेज में सीटों के मुताबिक क्लासरूम, मूटकोर्ट हॉल, शिक्षकों की संख्या, लाइब्रेरी, इंटरनेट, कॉमन रूम आदि को देखा जाता है। तीन साल में बीसीआई साढ़े तीन लाख रुपये फीस लेती है। फीस नहीं जमा करने पर हर साल दो लाख रुपये पेनाल्टी लगा दी जाती है।
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