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पश्चिमी यूपी के ऐतिहासिक मेरठ कॉलेज में एलएलबी का सत्र हो सकता है ब्रेक, ये रही बड़ी वजह

Fri, 20 Sep 2019 01:34 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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मेरठ कॉलेज मेरठ
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पश्चिमी यूपी के ऐतिहासिक मेरठ कॉलेज में एलएलबी का सत्र इस बार जीरो रह सकता है। बीसीआई (बार कांउसिल ऑफ इंडिया) ने अभी तक एडमिशन को लेकर कुछ भी स्पष्ट नहीं किया है। यह पहली बार होगा जब इस तरह से एलएलबी में सत्र ब्रेक हो जाएगा। जेवी जैन कॉलेज सहारनपुर का भी यही हाल है।

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चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी से संबद्ध 68 एडेड कॉलेजों में सिर्फ छह में ही एलएलबी है। एडेड कॉलेजों में तीन वर्षीय एलएलबी में 1460 सीटें हैं। इनमें गाजियाबाद के एमएमएच कॉलेज में 420 सीटें हैं। मेरठ कॉलेज में 300 सीटें हैं। एनएएस कॉलेज में 180, एनआरईसी कॉलेज खुर्जा में 120, डीएवी कॉलेज मुजफ्फरनगर में 320, जेवी जैन कॉलेज सहारनपुर में 120 सीटें हैं। इन कॉलेजों में एलएलबी की फीस महज नौ सौ रुपये सालाना है। सभी एडेड कॉलेजों में एडमिशन 31 अगस्त को समाप्त हो चुके हैं, लेकिन मेरठ कॉलेज और जेवी जैन कॉलेज सहारनपुर में छात्र-छात्राओं ने आवेदन तो किए पर बीसीआई से मान्यता पत्र नहीं मिलने के कारण इनकी मेरिट जारी नहीं हो पाई। 

बता दें कि 12 सितंबर से 16 सितंबर तक दिल्ली में बीसीआई की बैठक में ऐसे कॉलेजों के बारे में निर्णय लिया जाना था, लेकिन 19 सितंबर तक भी कोई जवाब नहीं आया है। ऐसे में इस बार एलएलबी का सत्र ब्रेक हो सकता है। पूरे मामले में मेरठ कॉलेज के प्रेस प्रवक्ता विनय बरसर ने बताया कि हमारी तरफ से सारे कागजात पूरे कर दिए गए थे। अभी तक बीसीआई ने कोई जवाब नहीं दिया है। आज यानी शुक्रवार को बीसीआई के ऑफिस में जाकर पता किया जाएगा।
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गरीब छात्रों का तो सपना ही टूट जाएगा
जिस तरह से एडेड कॉलेजों की तरफ बीसीआई का ऐसा रुख है, उससे आने वाले समय में एडेड कॉलेजों से एलएलबी ही खत्म हो जाएगी। सभी विभागों को सेल्फ फाइनेंस करना पड़ जाएगा। ऐसे में गरीब छात्र-छात्राओं का तो कानून की पढ़ाई करने का सपना ही टूट जाएगा। एडेड कॉलेजों में एलएलबी की फीस जहां नौ सौ रुपये है वहीं, विवि में अगले साल से तीन वर्षीय एलएलबी में 36365 रुपये फीस निर्धारित की है। दूसरे विवि में भी एलएलबी की फीस इससे ज्यादा ही है। हैरानी की बात ये है कि अभी तक भी किसी जनप्रतिनिधि ने भी कॉलेज में एलएलबी को लेकर बार काउंसिल ऑफ इंडिया में बात करने का भी प्रयास नहीं किया है।

ये है बीसीआई का नियम
बीसीआई हर तीसरे साल लॉ कॉलेजों का निरीक्षण करती है। निरीक्षण के दौरान कॉलेज में सीटों के मुताबिक क्लासरूम, मूटकोर्ट हॉल, शिक्षकों की संख्या, लाइब्रेरी, इंटरनेट, कॉमन रूम आदि को देखा जाता है। तीन साल में बीसीआई साढ़े तीन लाख रुपये फीस लेती है। फीस नहीं जमा करने पर हर साल दो लाख रुपये पेनाल्टी लगा दी जाती है।

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