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...सुनो तो कोई आखिर कहां है मेरा लाल, देखिए कैसे, बिलखते रहे बच्चे

Wed, 11 Oct 2017 06:08 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ शामली
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बच्चे अस्पताल में बिलखते रहे - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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शामली में बच्चों की चिंता में अभिभावकों की हालत भी खराब हो गई। अभिभावकों को सूचना मिलते ही सीएचसी में पहुंच गए। बच्चों की तलाश में कोई शहर के मोहल्ले से तो कोई दूर गांव से सीएचसी में पहुंचा। अस्पताल में अभिभावक एक दूसरे से पूछते रहे कि आखिर मेरा लाल कहां भर्ती है। वहीं अस्पताल में बच्चे बिलखते रहे।
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मंगलवार को हादसे के बाद आलम यह था कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के मुख्यमार्ग पर महिलाएं दौड़ लगाती हुई नजर आ रही थीं। हर महिला घबराई हुई थीं और आंखों में पानी था। महिलाएं अस्पताल में पहुंचकर अपने बच्चों को तलाश रही थीं। जैसे ही बच्चा सामने आया, तो उससे लिपटकर रोने तक लगी थीं। दरअसल, सरस्वती शिशु मंदिर जूनियर हाईस्कूल और बालिका विद्यामंदिर इंटर कॉलेज के छात्र-छात्राओं को हालत बिगड़ने पर सीएचसी शामली लाने के बाद उपचार दिलाया गया। बच्चों से नाम और मोबाइल नंबर मालूम करके अभिभावकों को सूचना दी गई थी। इसके चलते ही कुछ ही देर बाद अस्पताल परिसर अभिभावकों से भर गया था।

पढ़ें : शामली: गैस रिसाव से 300 बच्चे बीमार, शुगर मिल प्रबंधन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज
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अपने बच्चों को तलाशते रहे अभिभावक

बच्चों को अस्पताल ले जाते परिजन - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
वहीं, शामली सीएचसी से जिन बच्चों को गंभीर हालत के चलते तोमर नर्सिंग होम, शांति केयर हॉस्पिटल, अनंता हास्पिटल, लाइफ केयर हॉस्पिटल ले जाया गया था। सीएचसी में अभिभावकों को जब अपने बच्चे नहीं मिले, तो उक्त अस्पतालों में पहुंचने लगे थे। अभिभावक बच्चों की तलाश में यही एक-दूसरे से पूछ रहे थी कि मेरा बच्चा कहां है। इस दौरान दयानंदनगर निवासी किरण और रेखा, गांव खंदरावली निवासी अदित शर्मा, खेड़ीकरमू निवासी राजेश, गांव करोड़ी निवासी सतीश और गांव बरला जट निवासी लाखन सिंह अपने बच्चों को तलाशते हुए मिले। काफी देर बाद जब उनको बच्चे मिल गए, तब वह अपने बच्चों को उपचार दिलाने के बाद घर लौट गए।  

इंसानियत के लिए आगे आया समाज
बच्चों की जिंदगी बचाने के लिए हर कोई आगे आया। हादसे की जानकारी होते ही अपनी जिम्मेदारी मानते हुए समाज के लोग, मेडिकल स्टोर संचालक और प्राइवेट अस्पताल के लोग मदद करने में जुट गए। खुले मन से बच्चों की सेहत के लिए मदद की। एक साथ करीब 300 बच्चों के बीमार होने पर पुलिस-प्रशासन और स्वास्थ्य महकमे के पसीने छूट गए। बच्चों को एंबुलेंस के माध्यम से अस्पताल में लाना, उनकी सूची बनाना, उनके परिजनों को सूचना देना और बच्चों को वार्ड में शिफ्ट करना, तथा जिन बच्चों की हालत गंभीर हुई उनको रेफर करना, यह काम अकेले स्वास्थ्य विभाग और पुलिस-प्रशासन के बस में नहीं था, लेकिन लोगों ने इन कामों को करने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी। बच्चों के बीमार होने की खबर लगते ही अस्पताल में मदद करने वालों का तांता लग गया।  साथ ही बच्चों के उपचार के दौरान स्वास्थ्य विभाग और पुलिस-प्रशासन की ओर से उठाए गए कदम की सराहना की।

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