मेरठ में जिला प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में एक नवंबर तक पटाखों की बिक्री को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया। एडीएम सिटी मुकेश चंद्र और सिटी मजिस्ट्रेट एमपी सिंह ने स्पष्ट किया कि इसके लिए ना तो कोई स्थायी अथवा अस्थायी लाइसेंस दिए जाएंगे और ना ही पटाखे बेचने के लिए अनुमति दी जाएगी। जिले के सभी थानाध्यक्षों, एसडीएम और एसीएम को इसका सख्ती से पालन कराने का आदेश जारी कर दिया गया है। आतिशबाजी की बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबंध से जिले के ढाई हजार से ज्यादा आतिशबाजी विक्रेताओं को पचास करोड़ रुपये से ज्यादा का झटका लगेगा।
सुप्रीम कोर्ट से सोमवार को जारी आदेश के तहत मंगलवार को एडीएम सिटी और सिटी मजिस्ट्रेट ने पुलिस, प्रशासनिक अधिकारियों और पटाखा विक्रेताओं की बैठक बुलाई। एडीएम सिटी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अब एक नवंबर तक पटाखों की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है। ऐसे में अब पटाखों की बिक्री प्रतिबंधित हो गई है। एक नवंबर तक कोई भी पटाखों की बिक्री नहीं होगी। यदि किसी ने पटाखा बिक्री संबंधी रोक के आदेश का अनुपालन नहीं किया तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा जिले में पूर्व में जारी किए गए स्थाई या अस्थाई पटाखा बिक्री लाइसेंसों को एक नवंबर तक के लिए निलंबित कर दिया गया है। यह लाइसेंस फिलहाल मान्य नहीं होंगे। लाइसेंस प्राप्त दुकानदारों को लिख कर देना होगा कि उनके पास जो स्टॉक है उसे एक नवंबर तक नहीं बेचा जाएगा। बैठक में मौजूद थानाध्यक्षों, एसीएम, एसडीएम को पटाखा बिक्री पर कड़ी नजर रखने को कहा गया ताकि किसी भी स्थिति में उल्लंघन न होने पाए। सिटी मजिस्ट्रेट ने कहा कि पूर्व में 12 सितंबर को लाइसेंसी पटाखा विक्रेताओं के लिए बिक्री का आदेश दिया गया था। अब 12 सितंबर का आदेश निरस्त हो गया है। इसलिए कोई विक्रेता आतिशबाजी की खरीद बेच नहीं करेगा।
मेरठ में व्यापारी कर चुके हैं स्टॉक
पटाखों पर रोक
प्रतिबंध के आदेश ने जिले के एक हजार से ज्यादा व्यापारियों की दिवाली सूनी कर दी। कमाई की उम्मीद में कर्ज लेकर पटाखा बेचने वाले पूरी तरह टूट गये हैं। अधिकांश पटाखा विक्रेता एडवांस में आतिशबाजी खरीदकर स्टॉक कर चुके हैं।
जिले में करीब ढाई हजार पटाखों की दुकानें लगती हैं। महानगर, सरधना व मवाना तहसील में आतिशबाजी बेचने के लिए अस्थायी लाइसेंस लेने वालों की संख्या सैकड़ों में होती है। लेकिन पुलिस की साठगांठ से हजारों लोग दिवाली पर तीन दिन पटाखों की दुकान लगाकर रोजी रोटी कमाते हैं। वहीं, स्थायी लाइसेंस वाले करीब चालीस कारोबारी महीनों पहले 25-50 लाख रुपये तक के पटाखों का स्टॉक कर लेते हैं। इनमें डेढ़ दर्जन व्यापारी तीन डिपो में आतिशबाजी का स्टॉक रखते हैं। इनके अलावा सैकड़ों थोक व्यापारी अपने व्यक्तिगत गोदाम या घर में पटाखों का स्टॉक 1-2 माह पहले तो फुटकर व्यापारी दिवाली से 10-15 दिन पहले पटाखे खरीद लेते हैं।
मेरठ में पचास करोड़ की आतिशबाजी
आतिशबाजी विक्रेताओं के अनुसार मेरठ जनपद में पचास करोड़ से ज्यादा का आतिशबाजी का कारोबार होता है। जिसका स्टॉक भी इस समय आ चुका है। इसकी बिक्री मुख्य रुप से दीवाली पर ही होती है। सिर्फ चालीस स्थायी लाइसेंस धारक ही ऐसे हैं जो पूरे साल शादियों या अन्य खुशी के अवसरों पर होने वाली आतिशबाजी का सामान बेचते हैं। लेकिन उसका स्टॉक पांच - दस लाख रुपये का ही होता है।
ऐसे रखेंगे स्टॉक पर नजर
पटाखे
प्रशासन के अनुसार पिछले साल के स्थायी व अस्थायी लाइसेंस के साथ इस साल पटाखा बिक्री के लाइसेंस के आवेदनों की सूची तैयार हो रही है। इन सबके स्टॉक की जांच कर उसे होल्ड कराया जाएगा। साथ ही ऐसे पटाखा विक्रेता जो साठगांठ से बिना लाइसेंस पटाखा बेचते रहे हैं, उनके लिए खुफिया तंत्र सक्रिय किया जाएगा।
पटाखे दिखे तो थानेदारों पर होगी कार्रवाई
सुप्रीमकोर्ट के आदेश के बाद पटाखे बनाने व बिकने पर पूर्णत: प्रतिबंध लागू करने के लिए एसएसपी ने सभी थानेदारों और फायरब्रिगेड कर्मियों की मीटिंग ली। जिसमें एसएसपी से थानेदारों को चेतावनी दी कि अगर पटाखे दिखे तो उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।
जब्त होगा पटाखों का स्टाक
दमकल विभाग से दिवाली पर पटाखे बेचने के लिए सालाना 500 से ज्यादा अस्थायी लाइसेंस बनते थे। 1000 से ज्यादा लोग गुपचुप पटाखों की दुकान सजाते थे। पुलिस के अनुसार अस्थायी लाइसेंस का इरादा रखने वाले लोगों के पास करोड़ों के पटाखों हो सकते है। इनको अब जब्त किया जाएगा।
शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें
https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/