बुधवार सुबह करीब 8 बजे थे। कंकरखेड़ा में फाजलपुर स्थित निर्माणाधीन सैन्य ऑफिसर अपार्टमेंट। मजदूर मंगल सिंह को पता नहीं था कि कुछ ही पलों में उसका मौत से आमना-सामना होने जा रहा है। अभी वह ईंटें उठाने अपार्टमेंट परिसर में पहुंचा ही था कि उसे गुर्राने की आवाज सुनाई दी। तेंदुए को सामने देख उसके होश उड़ गए। दहशत में आवाज गले में फंसकर रह गई। तेंदुए ने बिना एक पल गंवाए उस पर हमला बोल दिया। मंगल का नसीब अच्छा था कि पंजा सीधे हाथ से भी ठीक से नहीं पड़ा।
खून देखकर मंगल की चीख निकली तो साथी मजदूरों ने लाठी, डंडे और सरिये से मोर्चा ले लिया। तेंदुए को डराने के लिए मशाल भी जला ली, लेकिन तेंदुआ तीनों और मजदूरों को घायल कर बैठा। करीब दो घंटे तक दहशत फैलाकर तेंदुआ 15 फीट ऊंची फेंसिंग को लांघकर 60 इंजीनियर्स जेसीओ मेस में जा छिपा।
मिलिट्री हॉस्पिटल से भागकर इस निर्माणाधीन अपार्टमेंट में पहुंचे तेंदुए को देखकर अफरातफरी का माहौल पैदा हो गया। पाला तेंदुए से पड़ा था, लेकिन दहशत के बावजूद मजदूर अपने साथी को बचाने के लिए जान की बाजी लगाने से पीछे नहीं रहे। छतरपुर (मध्यप्रदेश) निवासी संदीप के साथ रोजाना की तरह सारी लेबर काम पर पहुंची थी। ऐसे में अचानक से चीखने की आवाज आई तो वे सभी भागकर वहां पहुंचे। देखा कि साथी मजदूर मंगल सिंह पर तेंदुए ने हमला बोला है। मजदूरों ने शोर मचाया तो वो पंजा मारकर भाग गया। ऐसे में
मंगल को उठाकर मजदूर साइड में ले आये।
एक-दूसरे को ढूंढते रहे
मजदूरों ने तेंदुए को ढूंढना शुरू कर दिया। काफी देर कर ट्रैक्टर पर बैठकर भी पूरे क्षेत्र को देखा, लेकिन तेंदुआ कहीं दिखाई नहीं दिया। करीब 15 मिनट बाद अचानक से एक साथी को निर्माणाधीन अपार्टमेंट के ग्राउंड फ्लोर पर तेंदुआ घूमता मिला। तेंदुआ भी इन मजदूरों की ताक में लगा था। बड़ी दिक्कत यह थी कि अपार्टमेंट के अंदर तेंदुआ था तो अपार्टमेंट के ऊपर भी कुछ लोग थे, जिन्हें सुरक्षित निकालना था।
उठाए हथियार तो बिगड़ा तेंदुए
मजदूर संदीप, बबलू, महेश आदि ने तेंदुए से निपटने के लिए लाठी, डंडे और सरिया उठा लिए। उसे डराने के लिए मशाल भी जला ली। उम्मीद थी कि इतने सारे लोगों को देखकर तेंदुआ भाग जाएगा। ऐसे में जिस अपार्टमेंट में वो बैठा था, वहां पर ईंट व पत्थर फेंके गए, लेकिन इसका उलटा असर हुआ। तेंदुआ ने किसी सुरक्षित ठिकाने की तरफ भागने के बजाय सामने से ही हमला कर दिया। उसके हमला करने की रफ्तार इतनी तेज थी कि जैसे ही किसी ने उस पर सरिया मारा तो उससे पहले ही तेंदुए ने उस पर अटैक कर दिया। एक झटके में तेंदुए ने संदीप के अलावा बबलू और महेश को भी घायल कर दिया।’
‘नहीं रहना परदेश में’
सुभारती अस्पताल में भर्ती पश्चिम बंगाल निवासी मंगल तेंदुए के हमले को नहीं भुला पा रहा। उन खौफनाक पलों को याद कर उसका शरीर कांप जाता है। तेंदुए की दहशत से सहमे मंगल ने कहा कि ‘बस मौत के मुंह से बचा हूं’। उसने (तेंदुए) तो पल भर में मौत का अहसास कर दिया था। अब नहीं रहना यहां परदेश में। बस भगवान ही था, जो मुझे बचा ले गया। मुझे खुद बचने की उम्मीद नहीं थी।
‘शुक्र है मैं घूम गया था’
मध्यप्रदेश निवासी मजदूर संदीप ने बताया कि जब मैंने तेंदुए पर सरिये से हमला किया तो उससे पहले ही उसने मुझे पर अटैक कर दिया। गनीमत रही कि मैं एकदम घूम गया था, जिस कारण से वो गर्दन पर हमला नहीं कर पाया। जबकि तेंदुए ने मंगल के अलावा बबलू (बिहार) और महेश (मध्यप्रदेश) की गर्दन को निशाने पर लेकर पंजा मारा।
पौन घंटे बाद पहुंची पुलिस
अपार्टमेंट बना रही वीरेंद्रा कंस्ट्रक्शन लिमिटेड के अधिकारियों व लेबर का कहना है कि तेंदुए ने जैसे ही मंगल पर हमला किया तो उसके बाद पुलिस और सेना के लोगों को भी जानकारी दे दी थी, लेकिन करीब पौन घंटे के बाद वहां पर मदद पहुंच पाई, जिस कारण से भी ज्यादा लोग घायल हो गए।