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एक्सपोर्ट बंद, कौड़ियों के भाव बिका चमड़ा

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एक्सपोर्ट बंद, कौड़ियों के भाव बिका चमड़ा
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मेरठ। ईद उल अजहा के त्योहार पर पशुओं की बिक्री के साथ चमड़ा व्यापारियों की भी चांदी रहती है। एक्सपोर्ट बंद होने की वजह से इस बार कुर्बानी के पशुओं की खाल कौड़ियों के भाव बिक रही है। हालात ये हैं कि कुछ लोग इसे जमीन में दबा रहे हैं तो कुछ संस्थाएं इसके साथ पैसा भी ले रही हैं, जिससे खाल को इधर उधर न फेंका जाए।
चमड़े के बड़े व्यापारी शाहिद कुरैशी ने बताया कि मेरठ शहर में करीब पांच हजार कटरे और भैंस की कुर्बानी होती है। करीब 20 हजार बकरे ईद उल अजहा पर कुर्बान किए जाते हैं। बीते दो साल से सरकार ने चमड़े के एक्सपोर्ट पर पाबंदी लगा रखी है। इसके कारण चमड़े का रेट जमीन पर आ गया है। कटरे-भैंस का 1400 रुपये में बिकने वाला चमड़ा 150 रुपये में बिक रहा है। वहीं बकरे की 175 रुपये में बिकने वाली खाल के मात्र 20 से 30 रुपये मिल रहे हैं। व्यापारियों ने बताया कि पशुओं का चमड़ा मेरठ से इंडोनेशिया, मलेशिया, इटली सहित कई देशों में एक्सपोर्ट होता था। लेकिन इन दिनों हालात खराब हैं। कुछ मदरसे और संस्था वाले चमड़े के साथ पैसे जमा करा रहे हैं। ताकि उसे चमड़ा फैक्टरी तक पहुंचा सकें। वहीं व्यापारियों ने सरकार से चमड़ा एक्सपोर्ट शुरू करने की मांग की है।
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एक करोड़ का चमड़ा 12 लाख में बिका
शहर में पांच हजार कटरे-भैंस के चमड़े की कीमत करीब 70 लाख, जबकि 20 हजार बकरों के चमड़े की कीमत करीब 35 लाख होती थी। वर्तमान में दोनों पशुओं का चमड़ा मुश्किल से 12 लाख रुपये का बिका है। एक्सपोर्ट बंद होने के कारण पिछली बकरीद पर चमड़ा नालों में फेंकने के मामले भी सामने आए थे।
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