मेले में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने से मुख्य मार्गों और आसपास की संपर्क सड़कों पर भारी दबाव रहा। कई श्रद्धालुओं को वाहन चालना रोककर गंगा घाट तक पैदल जाना पड़ा। स्नान, पूजा-अर्चना और दीपदान के साथ घाटों पर भक्ति और उल्लास का वातावरण छाया रहा। जहां-जहां नजर जाए, हर-हर गंगे का घोष सुनाई देता रहा।
मखदूमपुर, हस्तिनापुर में गंगा मेला
- फोटो : अमर उजाला
गंगा तट पर भगवान सत्यनारायण कथा, हवन, आरती और सामूहिक भजन सत्संग भी चलते रहे, जिससे पूरा क्षेत्र आध्यात्मिक रंग में रंग गया। शाम के दीपदान ने घाटों की शोभा और अधिक बढ़ा दी। श्रद्धालुओं के लौटने और आने दोनों का सिलसिला देर रात तक जारी रहा। पुलिस और प्रशासन को भीड़ नियंत्रण व रूट डायवर्ट करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।