सरूरपुर। क्षेत्र के हर्रा कस्बे में श्रम विभाग और एएचटीयू की टीम ने मंगलवार को बाल श्रम के खिलाफ कई जगह छापा मारा। टीम ने ढाबों और दुकानों पर काम करते मिले चार बच्चों को मुक्त कराया। बाद में बच्चों को उनके माता-पिता के सुपुर्द कर दिया गया।
टीम के पहुंचते ही कस्बे में कई दुकानदार अपने प्रतिष्ठानों को बंद करके चले गए। मुक्त कराए गए बच्चों का चिकित्सा परीक्षण कराकर बच्चों को बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) मेरठ में पेश किया गया। समिति ने बच्चों को परिजनों के सुपुर्द कर भविष्य में उनसे बाल श्रम न कराने की चेतावनी दी। टीम में श्रम प्रवर्तन अधिकारी शशिकांत पांडेय, विनय दुबे, एएचटीयू प्रभारी अखिलेश गौड़, देवपाल गिरि, चाइल्ड लाइन व जनहित फाउंडेशन के कॉर्डिनेटर अजय कुमार शामिल रहे। सहायक श्रमायुक्त अवधेश वर्मा ने बताया कि बाल श्रम कराने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम के तहत छह माह से दो वर्ष तक के कारावास अथवा 20 हजार से 50 हजार रुपए तक के अर्थदंड का प्रावधान है।