मेरठ। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद से व्यापारियों में अफरा-तफरी का माहौल है। मामला न्यायालय से जुड़ा होने के कारण व्यापारी और अधिकारी सीधे टिप्पणी करने से बचते नजर आए, लेकिन दबे सुर में इसे व्यापारियों के खिलाफ घातक बताया। लोगों का कहना है कि डेढ़ हजार के करीब दुकानें हैं, ऐसे में सीधे तौर पर पंद्रह हजार लोग प्रभावित होंगे। इसी के साथ जो संपत्ति सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने से पहले 10 करोड़ रुपये की थी उसकी कीमत महज दो करोड़ रह गई।
व्यापारियों का कहना है कि ध्वस्तीकरण की कार्रवाई का पुरजोर विरोध किया जाएगा। व्यापारियों के मुताबिक सेंट्रल मार्केट में व्यापारियों के साथ ही काफी संख्या में कर्मचारी भी काम करते हैं। कुछ दुकानों पर जहां सामान्य तौर पर पांच से छह कर्मचारी हैं तो गारमेंट्स की बड़ी दुकानों पर इनकी संख्या 40 से 50 तक है। इसके अलावा छोटी-छोटी दुकानों से भी कई व्यापारी और परिवार जुड़े हैं। पॉश कॉलोनी में शुमार शास्त्रीनगर में बनी सेंट्रल मार्केट में जरूरत का हर सामान मिलता है। दीपावली पर तो शहर की सबसे सुंदर सजावट के साथ मेले का आयोजन होता है। खान-पान व जनरल स्टोर की तमाम दुकानों से होम डिलीवरी की भी व्यवस्था है।
सेंट्रल मार्केट में सरकारी दर भले ही जो हो लेकिन यहां संपत्तियों के दाम आसमान पर हैं। आबूलेन शहर के बड़े बाजार में शामिल है, लेकिन यहां संपत्ति पर कैंटोमेंट बोर्ड का अधिकार है। ऐसे में यहां संपत्ति और दुकानें खरीदने, बेचने में भी बहुत परेशानी होती है। दूसरी ओर शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट, आवास विकास की कॉलोनी है। यहां संपत्तियों के दाम बहुत ऊंचे हैं। व्यापारियों का कहना है कि सेंट्रल मार्केट में जो दुकानें व संपत्ति दस करोड़ रुपये की थी, वह महज दो करोड़ की अब आंकी जा रही है।