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नागपुर के दिल से मिली मेरठ के कोहली को जिंदगी

Fri, 01 Jun 2018 05:02 PM IST
यूपी अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ
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जसवंत राय हॉस्पिटल में प्रेसवार्ता करते डाॅ. राजीव अग्रवाल और अन्य - फोटो : अमर उजाला
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नागपुर का एक युवक तो जीवित नहीं है, मगर उसके दिल से मेरठ के युवक को नयी जिंदगी मिल गई। युवक का जसवंत राय अस्पताल में इलाज चल रहा था, जहां से उसे हृदय प्रत्यारोपण की सलाह दी गई, जो दिल्ली में सफलतापूर्वक हुआ।     

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हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. राजीव अग्रवाल ने बताया कि मेरठ निवासी आर. कोहली (35) को उठने-बैठने व सांस लेने में दिक्कत थी। कोहली के भाई ने उनसे संपर्क किया तो जसवंत राय स्पेशयलिटी अस्पताल में एंजियोग्राफी करने के बाद पता चला कि नसें पूरी तरह से ब्लॉक हैं और हृदय सिर्फ 20 प्रतिशत ही कार्य कर रहा है। छह महीने बाद ज्यादा तबियत बिगड़ने पर दोबारा उन्हें दिखाया गया। 

डॉ. राजीव अग्रवाल ने बताया कि हृदय प्रत्यारोपण के अलावा कोई और विकल्प नहीं था। उन्होंने बताया कि चेन्नई में डॉ. के बाला कृष्णा या एम्स में ही यह कार्य संभव है। मरीज के तीमारदारों ने उनकी सलाह मानते हुए एम्स में रजिस्ट्रेशन कराया। कुछ दिन बाद सूचना मिली कि दिल की व्यवस्था हो गई है। नागपुर से हृदय को हवाई जहाज से दिल्ली एयरपोर्ट लाया गया और एयरपोर्ट से 20 मिनट में एम्स पहुंचाया गया। एम्स के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. संदीप मिश्रा, डॉ. संदीप सेठ, डॉ. बलराम ने हार्ट ट्रांसप्लांट यूनिट में शिफ्ट कर दिया। आर्बो (ऑर्गन रिट्रीवल बैंकिंग आर्गेनाइजेशन) के डॉ. आरती विज ने जांच की। इसके बाद डॉ. संदीप मिश्रा, डॉ. संदीप सेठ, डॉ. बलराम द्वारा हृदय प्रत्यारोपण किया गया।

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कोहली परिवार के सात सदस्यों ने अंगदान करने के निर्णय के साथ लोगों को जागरूक करने का संकल्प लिया है। मरीज अब डॉ. राजीव अग्रवाल की देखरेख में है और स्वस्थ है। कोहली ने बताया कि उनके इलाज में करीब 11 लाख रुपये का खर्च आया।

यह भी सफल ऑपरेशन है
डॉ. राजीव अग्रवाल ने बताया कि गुर्दा प्रत्यारोपण की तरह ही हृदय प्रत्यारोपण भी एक सफल ऑपरेशन है। समाज की जागरूकता के लिए यह जानकारी आवश्यक है। गुर्दा प्रत्यारोण तो परिवार के सदस्यों द्वारा ही दिया जाना संभव है, परंतु हृदय प्रत्यारोपण बिना रिश्तेदार बिना जानकार के भी संभव है। हृदय मृत मस्तिष्क वाले जवान और स्वस्थ व्यक्ति से निकाला जाता है। ऐसे व्यक्ति आमतौर पर एक्सीडेंट में मृत्यु को प्राप्त होते हैं। समाज से अपेक्षा की जाती है उनमें इस दुख की घड़ी में अपने विवेक का इस्तेमाल कर अंगदान की भावना प्रेरित हो।

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