सियासी वजूद पाने के लिए लंबे समय से जद्दोजहद कर रहे रालोद के लिए कैराना की जीत संजीवनी जैसा साबित होगी। लखनऊ और दिल्ली की सियासत में एक जीत के बाद फिर चौधरी अजित सिंह की साख पुख्ता हुई है। यह भी साबित हो गया कि वर्ष 2019 के चुनाव में वेस्ट यूपी का चुनाव बेहद दिलचस्प होने जा रहा है।
नेताओं के जाने से रालोद को सहानुभूति
छपरौली विधायक सहेंद्र सिंह रमाला के अलावा विधानसभा चुनाव 2017 से पहले योगेश धामा भाजपा के पाले में गए, वर्तमान में धामा बागपत से भाजपा के विधायक हैं। पूर्व विधायक साहब सिंह और जिलाध्यक्ष ठाकुर प्रदीप सिंह भी भाजपा के पाले में जा खड़े हुए। गढ़ में ही एक-एक करके नेताओं के भाजपा के पाले में जाने से भी रालोद को वोटरों की सहानुभूति मिली।
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