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बेटी की सुरक्षा के लिये मां बनी ‘कोच’  

Sat, 02 Apr 2016 01:56 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
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मेरठ के स्पोर्ट्स स्टेडियम में मां के साथ अभ्यास करती किरन। - फोटो : अमर उजाला
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बेटी के सपनों को पंख लगे। सफलता की राह में असुरक्षा जैसी अड़चनों से उसके कदम न ठिठकें। इसलिये एक मां कोच की भूमिका में आ गई है। वह अपनी बेटी के साथ रोजाना पांच घंटे कैलाश प्रकाश स्पोर्ट्स स्टेडियम गुजारती है। प्रैक्टिस के दौरान उसकी खामियां बताती है और आगे बढ़ने के लिये प्रेरित भी करती है।
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मुजफ्फरनगर निवासी किरन बालियान शॉर्ट पुट में नेशनल स्तर पर सिल्वर मेडल जीत चुकी हैं। उनके पिता सतीश बालियान पीएसी में हेड कांस्टेबल हैं। फिलहाल, वह मेरठ में तैनात हैं। किरन रोजाना सुबह-शाम अपनी मां बॉबी के साथ स्टेडियम में प्रैक्टिस करती हैं। 12वीं की परीक्षा देने चुकीं किरन कहती हैं कि इससे पहले पिता की पोस्टिंग आगरा में थी। वहां कभी-कभी मम्मी मेरे साथ स्टेडियम जाती थीं, लेकिन मेरठ में रोजाना हम साथ में स्टेडियम आते हैं। बकौल किरन, यहां कोई महिला ट्रेनर नहीं है, जो मुझे प्रैक्टिस कराए।

मां बॉबी कहती हैं कि बेटियों की सुरक्षा बड़ा मुद्दा है। आज के जमाने में किसी पर भरोसा नहीं किया जा सकता है। इसलिये रोजाना स्कूटी पर किरन के साथ स्टेडियम आती हूं। सुबह सवा छह से आठ बजे तक स्टेडियम में रहती हूं। इसके बाद शाम चार से साढ़े छह बजे तक फिर अभ्यास कराती हूं। बाकी समय में घर का काम, बेटी को खाना देना, यह सब करती हूं। बेटा बास्केटबॉल खेलता है, लेकिन वह छोटा है। अब सपना है कि बेटी जल्दी से ओलंपिक में खेले और देश का नाम रोशन करे, तो मेरी तपस्या भी सफल हो जाए।
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महिला कोच न होना बड़ी परेशानी
स्टेडियम में शार्ट पुट की कोई महिला कोच नहीं है। इस कारण अभ्यास में परेशानी होती है। बॉबी बताती हैं कि  स्ट्रेचिंग कराना, प्रैक्टिस कराने में दिक्कत आती है। इसमें लड़कों की मदद नहीं ले सकते हैं। इसीलिये यह सब मैं खुद ही कराती हूं।

गलती बताना भी मां का काम
बॉबी केवल बेटी को व्यायाम नहीं करातीं, बल्कि वीडियो बनाकर उसकी गलतियां भी बताती हैं। बेटी के साथ रोजाना स्टेडियम आकर बॉबी इस खेल की सभी बारीकियों को समझ चुकी हैं। आठवीं पास बॉबी का कभी खेलों से ताल्लुक नहीं रहा, लेकिन बेटी के साथ आते-आते वह मंझे हुए कोच की तरह बन गई हैं।
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