मेरठ के सोरखा गांव में रोजाना की तरह चहल पहल थी। कोई किसान खेत से लौट रहे थे तो कोई बुग्गी लेकर चारा लेने जा रहा था। गांव के रास्ते पर भोलू स्विफ्ट से आ रहा था, तभी तीन हत्यारों ने कार के आगे बाइक लगा दी। बाइक में टक्कर लगते ही कार असंतुलित होकर बडे़ पत्थर से टकरा गई। हत्यारों ने कार में बैठे भोलू पर तब तक गोलियां चलायीं, जब तक भोलू ने कार की सीट पर दम नहीं तोड़ दिया। उसे संभलने का कोई मौका तक नहीं दिया। यह वारदात गांव के दर्जनों लोगों ने देखी, लेकिन हत्यारों के सामने कोई कुछ बोलने का साहस नहीं जुटा पाया था।
भोलू की हत्या करने के बाद हत्यारे निचित्रा को मारने के लिए पैदल ही उसके घर पहुंचे। उस समय निचित्रा अपनी ननद बीरवती के साथ घर के बाहर धूप में चारपाई पर बैठी थी। हत्यारे हाथों में पिस्तौल लेकर उसके पास पहुंचे और तीन तरफ से घेरकर निचित्रा पर गोलियां बरसा दीं। बीरमती किसी तरह जान बचाकर निकली।
गोली लगते ही की भागने की कोशिश
पहली गोली लगते ही निचित्रा ने उठकर भागने की कोशिश की, लेकिन हत्यारों ने कोई मौका नहीं दिया। पेट और सिर में आठ गोलियां मारी गयीं। हत्यारे निचित्रा को किसी भी हालत में जिंदा नहीं छोड़ना चाहते थे, इसलिए अपने साथ अलग से भी हथियार लाये थे।
एक हत्यारे की पिस्तौल नहीं चली तो उसने पिस्तौल को वहीं फेंक दिया और दूसरी पिस्तौल निकालकर गोलियां चलायीं। बाद में हत्यारे उस पिस्तौल को उठाकर ले गये। ये पूरी वारदात निचित्रा के घर में लगे सीसीटीवी में कैद हुई। करीब 25 सेकेंड में हत्यारों ने अपनी पिस्तौले निचित्रा पर खाली कर दी।
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