मुश्ताक खान ने बताया कि सुबह चार बजे मस्जिद में अजान सुनकर सुबह होने की जानकारी हुई। साहस किया और बंधनमुक्त होकर घर से बाहर निकले। रास्ते में टेंपो चालक मिला, जिसने मस्जिद तक जाने का रास्ता बताया था। वहां पहुंचे और लोगों ने मदद की। 21 नवंबर को गाजियाबाद में अपने दोस्त के घर पहुंचे और 22 नवंबर को मुंबई वापस पहुंच गए। बदमाशों ने दो दिन उन्हें बिजनौर में ही ढूंढा था।
सिंचाई विभाग के सचिव आईएएस डॉ. हीरालाल अपने निजी काम से सात दिसंबर को मुंबई में दोस्त अभिनेता अनुराग कुशवाहा के पास गए थे। अनुराग ने मुश्ताक को फोन करके अपने घर मुंबई में बुलाया। जहां पर मुश्ताक ने आईएएस को अपहरण कांड की आपबीती सुनाई। आईएएस ने बिजनौर पुलिस से फोन पर बात की, तब जाकर पुलिस ने मुश्ताक की कंपनी मैनेजर की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया। मुश्ताक ने मुकदमा दर्ज करने के बाद छह दिन में अपहरण करने वाले बदमाशों का पर्दाफाश करने पर बिजनौर पुलिस की सराहना की।
मुश्ताक ने कहा कि बिजनौर एसपी अभिषेक झा, एसपी सिटी संजीव बाजपेयी और उनकी पुलिस टीम ने इस गिरोह का खुलासा कर मुंबई फिल्म इंडस्ट्री के कलाकारों का विश्वास जीता है। आईएएस डॉ. हीरालाल का कहना है कि मुश्ताक बहुत डरे हुए थे। मुंबई पुलिस ने उनका मुकदमा दर्ज नहीं किया था। बाद में बिजनौर पुलिस ने मुकदमा लिखा और बदमाशों की फर्जी इवेंट कंपनी का पर्दाफाश कर दिया।