पुराने अफसरों से ली जा सकती है मदद
पुलिस के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक तब आतंकवाद ग्रस्त क्षेत्रों में तैनात रहे कई आईपीएस अधिकारियों की मदद लेने पर विचार हो सकता है। इनमें से सीडी त्रिपाठी, स. हरभजन सिंह, सुलखान सिंह, और बीएस सिद्धू सेवानिवृत्त हो चुके हैं। विवेचना टीमों में शामिल रहे इंस्पेक्टर और सीओ भी रिटायर हो चुके हैं या उत्तराखंड में हैं।
स्थानीय सिखों ने ही किया हमेशा विरोध
आतंकियों का स्थानीय सिखों ने ही हमेशा विरोध और मुकाबला किया। 1997 में सहारनपुर के गंगोह थानांतर्गत गांधीनगर में स. हरभजन सिंह के डेरे पर सतराना गिरोह ने हमला किया था। वह सिखों को आतंकियों का विरोध करने के लिए कहते थे। हमले में हरभजन, उनका कमांडो बेटा, पत्नी और पौत्री मारे गए थे। मौके पर पहुंची पुलिस की बुलेट प्रूफ टाटा 407 को भी माइन्स विस्फोट से उड़ा दिया था, जिसमें तत्कालीन एसओ कुलदीप असवाल की दोनों टांगें उड़ गई थीं।
रिमांड पर लिए जाएंगे आरोपी
हमारी पुलिस ने ही गिरफ्तारी और राइफलों की बरामदगी की है। फरार बाकी दोनों आरोपियों की भी तलाश की जा रही है। तीनों बदमाशों का कोर्ट से रिमांड पर लेकर इनके नेटवर्क की जानकारी की जाएगी। खुफिया विभाग और पुलिस पूरी तरह सतर्क है।
-प्रशांत कुमार, एडीजी, पुलिस जोन मेरठ
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