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दिवाली के लिए सिंथेटिक मिठाइयां और केमिकल केक, यूपी के इस शहर में हो रही सेहत बिगाड़ने की तैयारी 

Wed, 17 Oct 2018 01:00 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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मेरठ न्यूज - फोटो : अमर उजाला
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त्योहारी सीजन में मिलावटी मिठाई का कारोबार जोरों पर है। यूपी के मेरठ की सरधना तहसील में यह धंधा इन दिनों तेजी से पनप रहा है। कई गांव ऐसे हैं जहां मिलावटी मिठाई का कारोबार कुटीर उद्योग के रूप में है और इस समय हर गली में भट्टियां धुआं उगल रही हैं। 

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दीपावली पर ही मिठाई की सबसे ज्यादा खपत होती है। एक वर्ग के बीच भले ही ब्रांडेड कंपनियों के गिफ्ट पैक इस मिठाई की जगह ले चुके हों, लेकिन बहुत बड़े वर्ग में अभी भी खुली मिठाई का चलन है। सफेद रसगुल्ला, मिल्क केक और सोन पापड़ी के साथ बर्फी और गुलाब जामुन सबसे ज्यादा बिकते हैं। रसगुल्ला और केक के लिए सिंथेटिक मावा यहां से भेजा जाने लगा है। सफेद रसगुल्ला, मिल्क केक और सोहनपापड़ी तैयार करके भेजे जाते हैं। गांव जसड़ सुल्तानपुर, मुल्हैड, जुल्हैड़ा आदि में यह कारोबार इस समय तेजी से चल रहा है। 


ये है मिलावट का खेल 
सफेद रसगुल्ला बनाने के लिए दूध का छेना और मैदा का प्रयोग होता है, लेकिन सिंथेटिक मावा बनाने के लिए दूध के बजाए मैदा, मिल्क पाउडर, वनस्पति घी या चर्बी, अरारोट और केमिकल का प्रयोग होता है। जबकि बेसन से तैयार होने वाली सोन पापड़ी को मैदा और रंग मिलाकर बनाया जाता है। इनका मिश्रण तैयार कर उसे पकाकर मावा तैयार किया जाता है। 

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सस्ता माल, डिमांड ज्यादा
बाजार में शुद्ध मिठाई के मुकाबले यहां तैयार मिठाई तीन गुना तक सस्ती है। रसगुल्ला और मिल्क केक थोक में लगभग 75 रुपये, सोनपापड़ी लगभग 60 रुपये और मावा मात्र 100 रुपये किलो में सप्लाई किया जाता है। जिस कारण मेरठ के अलावा आसपास के जिलों और दिल्ली में इसकी डिमांड है। हरियाणा में भी यहां से तैयार मिठाई और मावा सप्लाई होता है। 

सुबह निकलती हैं गाड़ियां
तड़के तीन बजे से पांच बजे के बीच दो भागोें में बंटा कैंटर इस मिलावटी मिठाई और मावे को लेकर दिल्ली व अन्य जिलों के लिए निकलता है। इसमें आगे के भाग में ड्रम होते हैं और उसके ऊपर तख्ते लगाकर परांत रखी होती है। ड्रम में जहां रसगुल्ले भरे होते हैं तो परांत में मिल्क केक, सोहनपापड़ी, मावा और पीछे के हिस्से में सब्जी भरी होती है। 

दिखावे की छापामारी
खाद्य अभिहित विभाग की इस मिलावट के थोक कारोबार पर कभी नजर टेढ़ी नहीं हुई। इक्का दुक्का बार ही यहां छापेमारी हुई, लेकिन कभी नियमित मॉनिटरिंग कर इसे रोकने का प्रयास नहीं किया गया। 
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मेरठ न्यूज - फोटो : अमर उजाला
नियमों की भी उड़ा  रहे धज्जियां 
यह पूरी मिठाई गंदगी के बीच तैयार होती है। इसे तैयार करने में किसी भी प्रकार की सफाई का कोई ध्यान नहीं रखा जाता है। यही नहीं बाल श्रम की भी इसमें खुलकर धज्जियां उड़ायी जाती हैं। दीपावली पास आते आते जब मांग ज्यादा बढ़ जाती है तो 10 से 15 साल तक के बच्चे भी मिठाई तैयार करते इन भट्टियों के पास नजर आते हैं। 

मेरी जानकारी में इन गांवों के प्रकरण आने शुरू हुए हैं। शीघ्र ही टीम तैयार कर इन पर न केवल छापेमारी होगी, बल्कि सख्त कार्रवाई भी तय की जाएगी। मिलावटी  खाद्य पदार्थों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा।  -अर्चना धीरान, खाद्य अभिहित अधिकारी 

11 बोरी कचरी और 69 किलो पाउडर मसाला सीज 
एफएसडीए की खाद्य सुरक्षा प्रशासन विंग ने मंगलवार को मिलावट के संदेह में छापेमारी कर 11 खाद्य पदार्थों के नमूने लिए। अभिहित अधिकारी अर्चना धीरान ने बताया कि टीम ने साईपुरम स्थित पंकज सिंघल की पंकज ट्रेडिंग कंपनी पर छापा मारा।

प्रतिष्ठान में चौलाई, मूंगफली दाना, मसाले, कचरी भंडारित थी। मसाले का एक और कचरी (रंगीन) के दो नमूने संग्रहित किए 11 बोरी रंगीन कचरी के और सात कट्टों (69 किलो) चपटपट पाउडर मसाला को सीज कर दिया है। मवाना से दो स्थानों से गुड़ के नमूने, खरखौदा जमना नगर से मिर्च पाउडर, हल्दी पाउडर, बेसन और चावल के सैंपल लिए गए।

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