बिजनौर में पुलिस टॉर्चर से मौत के मामले में भाजपा के नूरपुर के विधायक लोकेंद्र चौहान, उनके भाई सीपी सिंह, बिजनौर सदर सीट से समाजवादी पार्टी की पूर्व विधायक रूचि वीरा व थाने के दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। धारा 342, 504 व 304 में मुकदमा दर्ज किया गया। वहीं आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर पीड़ित पक्ष ने शनिवार सुबह बिजनौर-मेरठ मार्ग पर शव रखकर जाम लगाया। इस दौरान हजारों गाड़ी जाम में फंसी रही। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत भी मौके पर पहुंच गये। मामला बढ़ता देख एसएसपी व डीएम भी मौके पर पहुंच गये और मामले को शांत कराने की कोशिश की।
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जानकारी मिल रही है कि गिरफ्तारी के लिये पुलिस पूर्व विधायक रूचि वीरा के केम्प पर पहुंची।
ग्रामीणों ने थाने के सामने शव रखकर भी किया था विरोध
धरने पर बैठे लोगों ने रोड जाम किया
उल्लेखनीय है कि राज्यमंत्री अतुल गर्ग की कार और उसमें बैठे नूरपुर के विधायक लोकेंद्र चौहान पर हमले के प्रकरण में एक आरोपी के पिता की मौत पर शुक्रवार रात जमकर हंगामा हुआ। ग्रामीणों थाने के सामने शव रखकर धरने पर बैठ गए। कुछ लोगों ने थाने में घुसकर तोड़फोड़ की भी कोशिश की। शव लेने पहुंची एंबुलेंस में तोड़फोड़ की गई। इंस्पेक्टर को घेर कर उनके साथ धक्का मुक्की की गई। परिवारीजनों का आरोप है कि पुलिस ने तीन दिन से उन्हें अवैध रूप से हिरासत में रखा हुआ था और शुक्रवार को छोड़ा। पुलिस उत्पीड़न के सदमे से उनकी मौत हो गई। समाचार लिखे जाने तक हंगामा जारी था और अधिकारी ग्रामीणों और मृतक के परिवारीजनों से बात कर रहे थे।
आनन फानन में दूसरे थानों में शिफ्ट कर दिया
रोड पर शव रखकर किया विरोध प्रदर्शन
फजीहत से बचने और ग्रामीणों का गुस्सा देख पुलिस ने हवालात में बंद अन्य लोगों को आनन फानन में दूसरे थानों में शिफ्ट कर दिया। छह अगस्त को बिजनौर पीडब्लूडी गेस्ट हाउस पर राज्यमंत्री अतुल गर्ग की गाड़ी और उसमें बैठे विधायक लोकेंद्र चौहान पर हुए हमले के मामले में पुलिस ने जांच के बाद गांव डेहरी माहेश्वरी के नृपेद्र राठी का नाम आरोपियों में शामिल किया था। आरोप है कि पुलिस ने नृपेंद्र की गिरफ्तार को दबाव बनाने के लिए उनके पिता जसवंत सिंह (65) को पुलिस ने तीन दिन से अवैध रूप से हिरासत में रखा हुआ था। शुक्रवार को नृपेंद्र राठी ने न्यायालय में पेश होकर अपनी जमानत करा ली, इसके बाद जसवंत सिंह को छोड़ा दिया गया। घर ले जाते समय रास्ते में इनकी तबीयत खराब हो गई। परिवारीजन चिकित्सक के यहां ले गए, जहां उनकी मौत हो गई। इसके बाद परिवारजन शुक्रवार रात करीब 10:15 बजे शव लेकर कोतवाली आ गए। शव रखकर धरने पर बैठ गए। उधर जाट समाज के सदस्य भी मौके पर पहुंच गए। ये लोग विधायक लोकेंद्र चौहान, उनके भाई सीपी सिंह, पूर्व विधायक रुचि वीरा, एसपी अतुल गर्ग के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की मांग कर रहे थे।
इस दौरान भीड़ ने इंस्पेक्टर फतेह सिंह को भी घेर लिया। किसी तरह पुलिस कर्मियों ने उन्हें बचाकर थाने से बाहर भेजा। इनका आरोप है कि विधायक के भाई सीपी सिंह गिरफ्तारी के लिए पुलिस पर लगातार दबाव बना रहे हैं और पुलिस परिवारीजनों व निर्दोष लोगों का उत्पीड़न कर रही है। इस दौरान पुलिस ने शव को ले जाने के लिए थाने में एंबुलेंस बुलाई, गुस्साए लोगों ने एंबुलेंस के शीशे तोड़ दिए, इसके बाद एंबुलेंस वापस चली गई। परिवारीजनों का आरोप है कि जसवंत सिंह बुजुर्ग थे और उनके हृदय की बाइपास सर्जरी भी हुई थी। वह लगातार पुलिस को सर्जरी से संबंधित कागजात दिखाकर उन्हें छोड़ने की गुहार लगा रहे थे, लेकिन इसके बाद भी पुलिस ने उन्हें नहीं छोड़ा और उनका उत्पीड़न करती रही। पुलिस हिरासत में हुए टार्चर के सदमे से उनकी मौत हुई है।
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