मामले की जांच कर रही एसआईसी (स्पेशल इंवेस्टिगेशन सेल) ने यह तर्क देकर एफआर लगा दी थी कि झगड़े में शाहनवाज की मौत हुई थी। इस दौरान मौके पर सचिन और गौरव ही थे। इन दोनों की उस समय ही मौत हो गई थी। बाद में शाहनवाज के पिता सलीम की ओर से 16 नवंबर 2015 को कोर्ट में निजी परिवाद दाखिल किया गया।
न्यायालय ने इसे स्वीकार करते हुए 30 मई 2018 को आरोपी बनाए गए रविंद्र सिंह, बिशन, प्रह्लाद, तेंदू, देवेंद्र और जितेंद्र को तलब किया था, लेकिन आरोपी पेश नहीं हुए। इस पर इन सभी के खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी हो चुके हैं।
आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिली। आठ फरवरी को सचिन और गौरव हत्याकांड में सात दोषियों को सजा सुनाई गई थी। इस दौरान कचहरी परिसर में हत्यारों के परिजनों ने हंगामा किया था। मृतक शाहनवाज के पिता सलीम और हत्याकांड में जेल गए मुजस्सिम और मुजम्मिल के पिता नसीम का कहना था कि पुलिस-प्रशासन आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं कर रहा है।
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