बच्चों के साथ खेल रही थी मासूम काव्या, अचानक पैर फिसलने से तालाब में गिरी
फोटो
संवाद न्यूज एजेंसी
जानीखुर्द। गांव कुराली में सोमवार शाम घर के पास बच्चों के साथ खेल रही चार वर्ष की मासूम बच्ची काव्या गहरे तालाब में जा गिरी। जब तक ग्रामीण उसे बाहर निकालते, तब तक मासूम सांसें तोड़ चुकी थी। बच्ची की मौत से परिवार में मातम पसरा है। गांव में हर कोई शोकाकुल है।
कुराली गांव निवासी सन्नी मजदूरी करता है। उसके परिवार में पत्नी मीनाक्षी, चार बच्चों में बड़ी पुत्री श्रुति (7), पुत्र वंश (5), पुत्री काव्या (4) और पुत्र रुद्र (6) है। काव्या सोमवार शाम अपने घर के बाहर अन्य बच्चों के साथ हंसती-खेलती घूम रही थी। खेलते-खेलते वह घर के समीप ही स्थित तालाब के किनारे पहुंच गई और अचानक पैर फिसलने से गहरे पानी में समा गई।
काव्या को पानी में डूबता देख साथ खेल रहे बच्चों ने बदहवास होकर उसके घर की ओर दौड़ लगाई और मां मीनाक्षी को सूचना दी। मीनाक्षी की चीख-पुकार सुनकर आसपास के दर्जनों ग्रामीण घटनास्थल की तरफ दौड़े। बिना वक्त गंवाए कई ग्रामीण मासूम की जान बचाने के लिए तालाब के गहरे पानी में कूद पड़े।
ग्रामीणों ने कड़ी मशक्कत के बाद काव्या को पानी से बाहर निकाला, परिजन तुरंत उपचार के लिए स्थानीय डॉक्टर के पास ले गए। डॉक्टर ने परिजनों को बताया कि शरीर में पानी भरने और दम घुटने के कारण बच्ची की मौत हो चुकी है।
अपनी लाडली का बेजान शरीर देखकर मां मीनाक्षी और पिता सन्नी बदहवास हो गए। हंसती-खेलती मासूम की अचानक हुई मौत से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। इस घटना ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया है और हर किसी की आंखें नम हैं। रात में काव्या का अंतिम संस्कार कर दिया। सीओ सरधना आशुतोष कुमार ने बताया कि हादसे के संबंध में पुलिस को सूचना नहीं दी गई। जानी पुलिस को गांव भेज कर जानकारी मांगी गई है।
-
काव्या तो बस गुड़िया जैसी थी...
सुबोध चौधरी
जानीखुर्द। सोमवार की शाम घर के बाहर खेल रही काव्या का क्या पता था कि चंद कदमों की दूरी पर मौत का एक शांत और गहरा सन्नाटा उसका इंतजार कर रहा था। मां मीनाक्षी रसोई में शाम के खाने की तैयारी कर रही थी और काव्या घर के बाहर गली में अपनी तोतली आवाज में बच्चों से बात कर रही थी। अचानक गली की वो खिलखिलाहट एक खौफनाक सन्नाटे में बदल गई। साथ खेल रहे मासूम बच्चों ने जब काव्या को तालाब के पानी में समाते देखा, तो वे डर से कांपते हुए भागे चाची, काव्या पानी में चली गई।
मां मीनाक्षी के हाथ से बर्तन छूट गया। पैरों तले जमीन खिसक गई। वह नंगे पांव, बदहवास होकर तालाब की तरफ दौड़ी। उसकी चीख में एक मां का वो तड़पता हुआ दिल था, जो अपनी बच्ची की जिंदगी की भीख मांग रहा था। कोई मेरी काव्या को निकालो, वो पानी से डरती है। मीनाक्षी का यह एक वाक्य वहां मौजूद हर शख्स के कलेजे को छलनी कर गया।
ग्रामीणों ने बिना एक पल गंवाए तालाब में छलांग लगा दी। पानी की हर लहर के साथ मां की सांसें अटक रही थीं। कुछ ही देर में जब एक ग्रामीण काव्या के छोटे से, ठंडे पड़े शरीर को अपनी बाहों में समेटे बाहर निकला। काव्या की आंखें बंद थीं, उसके होंठ शांत थे। वो आंखें, जो कुछ देर पहले खुशियों से चमक रही थीं, बंद थी। मां ने ग्रामीणों से कहा कि काव्या को जल्दी डॉक्टर के पास ले चलो। इस बीच पिता सन्नी मजदूरी करके लौटे। वह भागकर अपनी लाडली के पास पहुंचा, उसे सीने से लगाया, तुरंत काव्या को लेकर डॉक्टर के पास पहुंचे। लेकिन डॉक्टर ने काव्या को मृत घोषित कर दिया।
काव्या की मौत की खबर मिलते ही परिजनों में चीख-पुकार मच गई। शव घर पहुंचने पर बड़ी संख्या में ग्रामीण सन्नी के घर पहुंच गए। हर कोई इस हादसे से स्तब्ध नजर आया।
रोते हुए मां मीनाक्षी बार-बार यही कहती रही- काव्या तो बस गुड़िया जैसी थी। मां के यह शब्द सुनकर वहां मौजूद ग्रामीणों की आंखें भी नम हो गईं। चंद मिनट पहले जिस बच्ची की हंसी घर में खुशियां भर रही थी, उसकी अचानक मौत ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया।
-