बवाली किशोरों से सूरजकुंड संप्रेक्षण गृह के आसपास रहने वाले लोग परेशान ही नहीं, दहशत में हैं। कानून व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। रोजाना किशोरों द्वारा पथराव से पुलिस और प्रशासन की अलग से परेड हो रही है, लेकिन इसका स्थायी समाधान ढूंढने के बजाय सभी विभागों के अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से पीछा छुड़ाने में लगे हैं।
एसएसपी जे. रविंदर गौड़ ने बृहस्पतिवार को स्पष्ट लहजे में कह दिया कि संप्रेक्षण गृह के किशोरों पर शिकंजा कसने का काम पुलिस का नहीं है। आम जनता प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायत करे, तब जाकर कुछ भला होगा।
संप्रेक्षण गृह में बुधवार रात से किशोरों का बवाल जारी है। किशोर छतों से कभी पुलिस पर तो कभी आबादी में पत्थर फेंक रहे हैं। अफसरों द्वारा इन बवाली किशोरों को समझाने का प्रयास बेअसर रहा।
लाचार हुई पुलिस कभी किशोरों को कानून का पाठ पढ़ाती तो कभी उनके परिजनों का हवाला देती रही, लेकिन किशोरों पर इसका कोई असर नहीं पड़ा। किशोरों के सामने नतमस्तक हुए पुलिस प्रशासन का यह रवैया देख आम जनता भी हैरान है।
जनता का सवाल कि आखिर अब इन बवाली किशोरों की शिकायत करें तो भला किससे। और कौन हमें रोजाना की इस दहशत से निजात दिलाएगा। पुलिस हो या प्रशासनिक अफसर, हर कोई अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहा है।
एसएसपी के सामने मीडिया ने जब बृहस्पतिवार को संप्रेक्षण गृह के बवाल का मुद्दा उठाया तो उन्होंने साफ कहा कि मामला प्रशासन का है। लोगों को अगर किशोरों के बवाल से शिकायत है तो वह प्रशासनिक अधिकारियों से मिलें। पुलिस इस मामले में लोगों की कुछ भी मदद नहीं कर सकती। ऐसे संप्रेक्षण गृह में हर कोई अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से भाग रहा है। जिम्मेदारी से अधिकारी कब तक भागेंगे।
56 किशोर बने हैं मुसीबत
पुलिस के मुताबिक संप्रेक्षण गृह में केवल 56 किशोर हैं। जिसमें बवाल करने वाले किशोरों की संख्या बहुत कम है। सवाल उठता है कि पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी इतने किशोरों को शांत नहीं कर पा रहे हैं। बताया गया है कि इन किशोरों के बीच कई तो बालिग हैं, जिनका मेडिकल परीक्षण होना बहुत जरूरी है। अगर सही तरीके से देखा जाए तो इन किशोरों से ज्यादा सरकारी कर्मचारी उनकी देखरेख में लगे हैं।
कब सुनेगा पुलिस-प्रशासन, दिलाएगा हमें इससे निजात
संप्रेक्षण गृह में किशोरों के उपद्रव के चलते आसपास के रहने वालों परिवारों ने दहशत में रात काटी। लोगों ने खुद को तो घरों में कैद कर लिया, लेकिन बाहर बंधे पशु बवाली किशोरों के पत्थर खाते रहे। पूरी रात किशोरों की गालियां सुनकर लोगों के कान पक गए। स्थानीय निवासियों ने बृहस्पतिवार को इन हालातों को बताते हुए सवाल किया कि पुलिस-प्रशासन कब हमें इससे निजात दिलाएगा।
संप्रेक्षण गृह के निकट गांधी नगर निवासी रजनी ने बताया कि बुधवार रात करीब 10:30 बजे वह परिजनों के साथ टीवी पर सीरियल देख रही थीं। अचानक संप्रेक्षण गृह में हल्ला मचना शुरू हुआ।
वह समझ गए कि फिर से बवाल शुरू हो गया है। कुछ ही देर में सायरन बजाती हुई पुलिस की कई गाड़ियां आ गईं। किशोर छत पर चढ़कर पुलिस पर पत्थर बरसाने लगे और पूरी रात यही सब चलता रहा। डर के मारे नींद नहीं आ रही थी। आधी रात के बाद उनके दरवाजे में तेज पत्थर लगा और पूरा परिवार सहम गया। पूरी रात दहशत में काटी।
संप्रेक्षण गृह के निकट लकड़ी का सामान बनता है। यहां रहने वाले सुभाष ने बताया कि दिन में पत्थरबाजी की वजह से यहां काम करने वाले कर्मचारी भी डर के कारण नहीं आए।
उनके घर के बाहर बंधे पशुओं पर पत्थर लगते रहे। चंद्रमोहन ने बताया कि उनकी पूरी फैमिली रात भर जगी रही। आशा ने बताया कि आए दिन के बवाल से उनके बच्चे इतने डर गए हैं कि यहां से मकान छोड़कर जाने की जिद करने लगे हैं।
अशोक और संतोष ने बताया कि पत्थर और ईंटें उनके मकान में आई। सन्नी ने बताया कि रात तीन बजे के बाद खूब बवाल हुआ, फायरिंग की आवाज आने से वह डर गए। गांधी नगर के लोगों ने संप्रेक्षण गृह को जल्द से जल्द शिफ्ट करने की मांग उठाई है।