- पति संग पांच दशक गुजार चुकीं बुजुर्ग महिलाएं बोलीं, हर साल बढ़ रही पर्व की अहमियत, बहू संग त्योहार मनाने का अलग ही मजा
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। करवाचौथ यानी पति-पत्नी के प्यार और समर्पण का पर्व। उल्लास तो वही हैं, लेकिन अब इसे मनाने का तरीका जरूर बदल गया है। जीवन साथी के साथ 4 से 5 दशक गुजारने वाली शहर की वरिष्ठ महिलाओं का कहना है कि 50 वर्ष कैसे बीत गए पता ही नहीं चला। पहले करवा चौथ सादगी के साथ मनाई जाती थी अब थोड़ी तड़क भड़क से मनाते हैं। फर्क बस इतना है कि पहले बहू बनकर करवाचौथ करते थे, अब सास बनकर पर्व मना रहे हैं।
उन्हें इस बात की खुशी है कि इस पर्व की अहमियत हर साल बढ़ती जा रही है। नई पीढी भी इसे पूरे श्रद्धाभाव से नए दौर के अंदाज में मनाती है।
मंजू-अजय त्यागी
- आज भी करवाचौथ को उसी उल्लास के साथ मनाते हैं जैसे पहले मनाई थी। करवाचौथ पर सजना-सवंरना तैयार होना उतना ही अच्छा लगता है जितना पहले लगता था।
पुष्पा-बलराम कुमार
- हमारे दौर में लोग शर्माते और सकुचाते थे। आजकल के बच्चे एकदम बिंदास हैं। व्रत हो या कोई पर्व खुलकर मनाते हैं। बच्चों को देखकर हम भी सीख रहे हैं। बेटी की पहली करवाचौथ है सब मिलकर खूब त्योहार मनाने की तैयारी कर रहे हैंं।
नीतू और राजीव गिरधर
- शादी को 55 साल हो चुके हैं, लेकिन आज भी करवाचौथ को पहले करवाचौथ की तरह ही मानती हूं। जमाना बदल गया हैं, लेकिन उन्होंने रीति रिवाज को आज भी नहीं बदला है।
शकुंतला- ब्रजवीर
- शादी को 58 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन आज भी करवाचौथ पर सुहाग वाली चुनरी की साड़ी पहनना अच्छा लगता है। अब बहू-बेटों को पर्व मनाते देख अच्छा लगता है कि समय बदल रहा है और त्योहारों में भी एक नयापन आ गया हैं।
प्रेमलता-अविनाश कोचर
बलराम और पुष्पा करवाचौथ स्टोरी फोटो
बलराम और पुष्पा करवाचौथ स्टोरी फोटो
बलराम और पुष्पा करवाचौथ स्टोरी फोटो
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