गंगा स्नान करते श्रद्धालु
- फोटो : अमर उजाला
मेरठ के हस्तिनापुर, परीक्षितगढ़, माछरा, सरधना में कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान स्थगित होने से हस्तिनापुर में मखदूमपुर, फतेहपुर प्रेम, भीकुंड समेत अन्य घाटों पर पुलिस का पहरा रहा। इसके चलते श्रद्धालुओं ने दूसरी जगह गंगा किनारे एवं गंगनहर में दीपदान कर पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। इस दौरान पुलिस ने रास्ते बंद करके श्रद्धालुओं को गंगा घाट पर नहीं जाने दिया।
हस्तिनापुर के मखदूमपुर गंगा घाट पर दीपदान के लिए श्रद्धालु नहीं पहुंच सके। इस पर उन्होंने दूसरी जगह गंगा किनारे पहुंचकर पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए दीपदान और पिंडदान किया।
गंगा स्नान करने पहुंचे श्रद्धालु
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गंगा घाट पर मुस्तैद रहे गोताखोर
मखदूमपुर गंगा घाट पर श्रद्धालुओं को रोकने के लिए पुलिस ने चौराहे को सील कर दिया। इसके बावजूद गंगा घाट पर एक प्लाटून पीएसी के गोताखोरों की तैनाती की गई है।
गंगा स्नान करने पहुंचे श्रद्धालु
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अन्य घाटों पर किया स्नान
पुलिस की सक्रियता के चलते श्रद्धालुओं ने मुख्य स्नान घाट मखदूमपुर, फतेहपुर प्रेम और भीकुंड पुल के बजाय खेतों से गुजरकर जहां-तहां जंगल में गंगा किनारे पहुंचकर पूजा-अर्चना कर पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की एवं दीपदान किया। वहीं, पुलिस के आने पर श्रद्धालु एवं पंडित ईख में छिप गए। उधर, बूढ़ी गंगा पर भी सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचे परंतु पुलिस ने मध्य गंगा नहर किनारे बैरियर लगाकर आगे नहीं जाने दिया।
गंगा स्नान करते श्रद्धालु
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कार्तिक पूर्णिमा पर मखदूमपुर गंगा घाट और हस्तिनापुर में बूढ़ी गंगा किनारे लगने वाले गंगा स्नान मेले के स्थगित होने से सैकड़ों लोगों की रोजी-रोटी छिन गई है। मेले के दौरान प्रतिवर्ष हजारों रुपये की दूब घास और सरकंडे से बनी टीकरी बेचने वाले बच्चे भी रविवार सुबह से शाम तक गंगा किनारों पर उदास बैठे रहे।
गंगा स्नान करते श्रद्धालु
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मेले से सैकड़ों लोगों की रोजी-रोटी जुड़ी हुई है। उन्हें उम्मीद थी कि मेले में कुछ बेचकर वे घर का खर्च ही नहीं चलाएंगे, कुछ नई खरीदारी भी करेंगे। कोरोना संक्रमण के कारण मेला स्थगित हो गया और उनकी उम्मीदें पूरी नहीं हुईं। रविवार को मखदूमपुर गंगा घाट पूरी तरह सुनसान था। वहां चार छोटे बच्चे दूब घास से बनी सरकंडे की टिकरी के लिए खरीदारों का इंतजार कर रहे थे।
टिकरी लेकर वापस लौटते बच्चे
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मोहित, शुभम, सोनू और देव ने बताया कि वे हर साल दीपदान करने के लिए सरकंडा और दूब घास से बनने वाली टिकरी तैयार कर 10 रुपये में बेचते रहे हैं। उम्मीद थी कि मेले में उन्हें अच्छी कमाई होगी और कपड़े खरीदेंगे। घर की और जरूरतों को पूरा करेंगे परंतु कोरोना के चलते ये संभव नहीं हो सका।