शहीद की पत्नी और बेटा पुलकित
- फोटो : अमर उजाला
लांस नायक सत्यपाल सिंह जब शहीद हुए तो उनकी उम्र 28 साल थी। बड़ा बेटा पुलकित साढ़े तीन साल और बेटी दिव्या ढाई साल की थी। वीर नारी बबीता देवी बताती हैं कि कई महीनों तक तो समझ में ही नहीं आया कि जिंदगी अब कैसे जीऊंगी। बबीता देवी बताती हैं कि सेना ने उनकी काफी मदद की। यूनिट के अफसर उन्हें भगत लाइंस ले आए। यहां पर वे 11 महीने रहीं इसके बाद उनको तोपखाना में क्वार्टर मिल गया। छह साल तक वहां रहने के बाद फिर वे कंकरखेड़ा डिफेंस एनक्लेव में आ गईं।
सरकार ने नहीं निभाया वादा
वीर नारी बबीता देवी बताती हैं कि सरकार ने जो वादे किए थे, आज तक पूरे नहीं किए गए। कई साल चक्कर काटने के बाद पेट्रोल पंप मिला। लेकिन वो भी कंपनी की जमीन पर है। कंपनी कब हमें निकाल दे, कुछ नहीं कह सकते हैं। बबीता देवी बताती हैं कि अगर उन्हें पता होता कि ऐसा धोखा हो रहा है तो वे पेट्रोल पंप का लाइसेंस लेती ही नहीं। इसके अलावा सरकार ने 25 बीघा जमीन देने का वादा किया था। लेकिन 18 बीघा ही दी। उसमें से भी आठ बीघा जमीन आज तक नाम नहीं हो पाई है। चक्कर काट-काटकर थक चुके हैं।
बेटा पुलकित बोला, पापा पर फख्र होता है
शहीद सत्यपाल सिंह के बेटे पुलकित एमबीए कर रहे हैं जबकि बिटिया दिव्या एमए कर रही हैं। दोनों बताते हैं कि उन्होंने तो पापा को नहीं देखा। लेकिन उनकी बहादुरी के किस्से सुनकर फख्र होता है।
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