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कपसाड़ प्रकरण: पुलिस के साथ तीखी झड़प और हल्का बल प्रयोग, हंगामा

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कपसाड गांव में स्थिति की जानकारी लेने पहुंचे एडीजी भानु भास्कर
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शनिवार को कपसाड़ गांव में पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे विभिन्न संगठनों व राजनीतिक दलों और पुलिस बीच खींचतान से खूब हंगामा हुआ। नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद के प्रस्तावित आगमन की सूचना पर पुलिस ने गांव को छावनी में तब्दील कर दिया था। इसके बावजूद भीम आर्मी, आजाद समाज पार्टी, भाजपा और एआईएमआईएम के कार्यकर्ताओं के पहुंचने से दिनभर तनाव का माहौल बना रहा।
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प्रशासन ने कार्यकर्ताओं को रोकने के लिए गांव के चारों ओर बैरिकेडिंग और नाकेबंदी की थी। इसके बावजूद कई कार्यकर्ता पगडंडियों के रास्ते सकौती मार्ग होते हुए रजवाहे के पुल तक जा पहुंचे। यहां पुलिस और आरएएफ के जवानों ने उन्हें रोका जिसके बाद दोनों पक्षों में तीखी नोकझोंक, गाली-गलौज और हाथापाई शुरू हो गई। विवाद का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर भीड़ को खदेड़ दिया। हालांकि कुछ कार्यकर्ता फिर भी खेतों के रास्ते पीड़ित परिवार तक पहुंच गए।
संगीत सोम और समता मूलक दल में टकराव

इससे पहले सुबह पूर्व विधायक संगीत सोम और भाजपा नेता पंडित सुनील भराला पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे। पुलिस ने उन्हें सीधे प्रवेश की अनुमति दी थी। इसी दौरान वहां मौजूद समता मूलक दल के कार्यकर्ताओं ने भाजपा सरकार पर दलित विरोधी होने का आरोप लगा दिया। इस पर संगीत सोम भड़क उठे। उन्होंने मृतका सुनीता के बेटे नरसी से स्पष्ट कहा कि यदि इन कार्यकर्ताओं को यहां बुलाया गया तो वह वापस चले जाएंगे। दोनों पक्षों के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए पुलिस ने बीच-बचाव कर मामला शांत कराया।
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एआईएमआईएम का प्रदर्शन और मुख्यमंत्री का इस्तीफा मांगा

दोपहर में एआईएमआईएम के कार्यकर्ता भी पुलिस की नाकेबंदी को चकमा देकर पगडंडियों के सहारे गांव में दाखिल हुए। पुलिस ने उन्हें गली के कोने पर रोक लिया जहां कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और मुख्यमंत्री से इस्तीफे की मांग की। बाद में पुलिस ने 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को ही पीड़ित परिवार से मिलने की अनुमति दी।
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