विशेष न्यायाधीश ने जेजे बोर्ड के फैसले को रखा बरकरार
कोर्ट ने कहा निजी स्कूल के रजिस्टर नहीं हो सकते सार्वजनिक दस्तावेज
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। बहुचर्चित कपसाड़ कांड में सुनीता की हत्या और उनकी बेटी रूबी के अपहरण के आरोपी पारस सोम को सेशन कोर्ट ने भी बालिग माना है। अपर जिला जज स्पेशल कोर्ट (पॉक्सो एक्ट) मोहम्मद बाबर खान ने जेजे बोर्ड के फैसले को बरकरार रखा है। इससे आरोपी पर अब बालिग के तौर पर केस चलेगा। आरोपी के वकील बलराम सोम का कहना है कि वह दसवीं की मार्कशीट के आधार पर आयु निर्धारण के लिए हाईकोर्ट में अपील दायर करेंगे।
आठ जनवरी 2026 को सरधना थाना क्षेत्र के कपसाड़ गांव में हुई वारदात के बाद जमकर हंगामा और राजनीति हुई थी। आरोपी को वारदात के समय नाबालिग होने का दावा किया गया था। 10 वीं की मार्कशीट के आधार पर उसकी जन्मतिथि 11 मई 2008 बताई गई थी। पुलिस ने भी आरोपी को बालिग मानते हुए आरोप पत्र दाखिल किया था। जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने आरोपी का मेडिकल ऑसिफिकेशन जांच कराया। इसकी रिपोर्ट के आधार पर जेजे बोर्ड ने आरोपी को बालिग माना था।
आरोपी के वकील ने इस फैसले के खिलाफ सेशन कोर्ट में अपील दायर की थी। अदालत ने अब उस अपील को खारिज कर दिया है। न्यायालय ने आदेश में कहा है कि आरोपी का कोई आधिकारिक जन्म प्रमाण पत्र नहीं बना था। स्कूल में दाखिले के समय पिता ने केवल मौखिक रूप से उम्र बताई थी। यही उम्र प्राइवेट स्कूल के रजिस्टर में दर्ज हो गई थी।
अदालत ने भारतीय साक्ष्य अधिनियम का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि प्राइवेट स्कूल या बिना मान्यता वाले कोचिंग सेंटर के रजिस्टर कानूनी रूप से सार्वजनिक दस्तावेज नहीं होते। इन्हें चलाने वाले भी लोक सेवक नहीं माने। शुरुआती जन्मतिथि केवल जुबानी दावे पर दर्ज हुई थी। वह भी एक प्राइवेट रजिस्टर में दर्ज की गई थी। ऐसे में उसी आधार पर बनी 10वीं की मार्कशीट की कानूनी अहमियत कम हो जाती है। इसका साक्ष्य मूल्य न के बराबर रह जाता है। मेडिकल जांच के जरिये उम्र तय करने का फैसला न्याय संगत है।-